संदीप पाठक पर केस, भाजपा ने बताया बदले की राजनीति
चंडीगढ़ा नई दिल्ली, आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियाँ दर्ज की हैं। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
हालाँकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुँचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं। दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी आपा की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है।
आप से 7 सांसदों का पलायन, भाजपा में शामिल होने से बड़ा झटका
कभी आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं।
गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने आप छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी। आप को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात-राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए।
पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से निर्वाचित हुए हैं। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर सातों सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी, जिससे उच्च सदन में आप के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई। (भाषा)
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