सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार: पोन्नम प्रभाकर
हैदराबाद, हैदराबाद प्रभारी एवं परिवहन एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने आज सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र द्वारा शुरू की गयी कैशलेस उपचार योजना की समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से योजना शुरू करने के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार जताया।
पोन्नम प्रभाकर ने सचिवालय में आयुष्मान भारत-जेएवाई योजना की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत दुर्घटना के एक सप्ताह के भीतर प्रत्येक पीड़ित को 1.5 लाख रुपये की वित्तीय सीमा तक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह योजना आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के तहत सूचीबद्ध प्रत्येक अस्पताल में लागू की गयी है। मंत्री ने कहा कि पुलिस को दुर्घटना की सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसका विवरण ई-डीएआर में दर्ज किया जाना चाहिए। सड़क दुर्घटना पीड़ितों को हर थाने में कैशलेस उपचार योजना के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। परिवहन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य और चिकित्सा, बीमा, एनआईसी को राज्य स्तर और जिला स्तर पर समन्वय करने पर उन्होंने जोर दिया।
पीएम-जेएवाई के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना, 2025 शुरू की है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को उनकी बीमा स्थिति की परवाह किए बिना दुर्घटना के पहले 7 दिनों के भीतर प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये की वित्तीय सीमा तक तत्काल और कैशलेस चिकित्सा उपचार प्रदान करना है।
योजना के लिए पात्र लोगों को दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होना होगा। आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिया जाएगा। साथ ही एनएचए द्वारा निर्दिष्ट अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। दुर्घटना पीड़ित का विवरण ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) और टीएमएस (लेनदेन प्रबंधन प्रणाली) के माध्यम से निर्बाध डेटा एक्सचेंज के लिए लागू किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि इससे आपातकालीन उपचार तुरंत शुरू होगा। कहीं भी सड़क दुर्घटना होने पर कोई भी व्यक्ति 112 हेल्पलाइन के माध्यम से दुर्घटना की सूचना दे सकता है। पीड़ित को निकटतम अस्पताल ले जाने के लिए 108 एम्बुलेंस भेजी जाएगी। उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। बाद में उन्हें निकटतम एनपैनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा। दावे की राशि मोटर वाहन दुर्घटना निधि से तय की जाएगी। बीमाकृत और गैर-बीमित/हिट एंड रन वाहनों के लिए अलग-अलग खातों के माध्यम से दावे का निपटान किया जाएगा।
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योजना के क्रियान्वयन हेतु निर्देश व समन्वय पर जोर
मंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि सड़क दुर्घटना के बारे में जानकारी पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए। दुर्घटना का विवरण ई-डीएआर में दर्ज किया जाए तथा दुर्घटना की वैधता का सत्यापन 24 घंटे के भीतर किया जाए। मंत्री ने कहा कि अस्पताल प्रबंधनों को भुगतान की परवाह किए बिना तत्काल उपचार प्रदान करना चाहिए। डिस्चार्ज के बाद दावा प्रपत्र संबंधित राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) को प्रस्तुत किया जाए।
पुलिस और अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित किये जाने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य और जिला सड़क सुरक्षा समितियों को योजना के कार्यान्वयन और कामकाज की निगरानी करनी चाहिए। किसी प्रकार की समस्या हो, तो जिला स्तरीय शिकायत अधिकारी के पास शिकायत दर्ज की जा सकती है। उन्होंने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए सभी सुविधाओं से युक्त अधिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने डीजीपी जितेंद्र को राज्य के सभी थानों में इस योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने के निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी जितेन्द्र, विशेष मुख्य सचिव अहमद नदीम, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव क्रिस्टीना जेड चोंग्थू, एसएचओटी अध्यक्ष शिवसेना रेड्डी, परिवहन आयुक्त सुरेन्द्र मोहन, संयुक्त प्रशिक्षण समन्वयक, यूनिसेफ, एनआईसी प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
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