नवकार मंत्र का करें जाप, सोया भाग्य होगा जागृत : चन्द्रप्रभजी
हैदराबाद, श्रद्धा और भक्ति के साथ अगर कोई व्यक्ति महामंत्र नवकार का जाप करता है, तो उसका सोया भाग्य जाग जाता है। नवकार मंत्र के जाप से तन के रोग दूर होते हैं, मन निर्मल होता है, आत्मा-परमात्मामय हो जाती है। यह वह महामंत्र है, जिसके जाप से अतीत में कभी सेठ सुदर्शन की सूली भी सोने का सिंहासन बन गई और श्रीमती के हाथ में आया साँप भी माला बन गया। नवकार मंत्र ब्रह्माण्ड की सिद्ध-बुद्ध शक्तियों से संपर्क साधने का दिव्य मंत्र है। यह अखिल मानवता का मंत्र है। नवकार मंत्र ने जैन धर्म को एक रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उक्त उद्गार नुमाइश मैदान में लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद द्वारा आयोजित 53 दिवसीय प्रवचनमाला के तहत नवकार मंत्र के चमत्कार विषय पर प्रवचन देते हुए राष्ट्र संत चन्द्रप्रभजी ने व्यक्त किए। समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्र संत चन्द्रप्रभजी ने कहा कि मंत्र भारतीय संस्कृति की आत्मा है और ओम् मंत्रों की आत्मा। सृष्टि का जन्म घर्षण से हुआ और घर्षण से ध्वनि व प्रकाश पैदा हुआ।
मंत्र साधना के चरण और ओम् की दिव्यता
प्रकाश से ईश्वरीय शक्ति पैदा हुई और ध्वनि से ओम। इसलिए ओम सारे मंत्रों का बीज मंत्र है। सारे मंत्र ओम् के विस्तार हैं। एक ओंकार के आह्वान से विश्व की सारी शक्तियों का आह्वान हो जाता है। संतप्रवर ने कहा कि जो मन को तारे वह मंत्र है। मंत्र को किसी ताम्र पत्र, भोज पत्र या ताड़ पत्र पर साकार कर दें, तो वह यंत्र बन जाता है और मंत्र अंकों से जुड़ जाए, तो तंत्र बन जाता है। मंत्र साधना के चार चरण होते हैं- उच्चारण, स्मरण, ध्यान एवं अंतर्लीनता।
जैसे हमारे पास बीस मिनट हैं, तो हम पाँच मिनट मंत्र का लय और ताल से उच्चारण करें, पाँच मिनट गहरी-लंबी साँस लेते हुए जाप करें, पाँच मिनट मंत्र के स्वरूप का हृदय या ललाट पर ध्यान करें और अंत में पाँच मिनट मंत्र में लीन हो जाएँ। इस तरह किया गया मंत्र जाप हमें चमत्कारिक परिणाम देगा। मंत्र-जाप करते समय और संख्या को देखने से ज्यादा जरूरी है मंत्र का मन से जाप करना। जब मंत्र के साथ तन, मन, श्वास और बुद्धि जुड़ जाती है, तो मंत्र सिद्ध हो जाता है।
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नवकार मंत्र की चमत्कारी शक्ति और व्यावहारिक उपयोग
संतप्रवर ने नवकार मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि यह हमें विश्व की पाँच शक्तियों अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु से जोड़ता है। इसमें पापों को नष्ट करने और विश्व का मंगल करने की कामना है। नवकार मंत्र में 68 अक्षर हैं, जो कि 68 तीर्थों के परिचायक हैं। अर्थात् एक बार नवकार मंत्र बोलने से हमें अड़सठ तीर्थों की यात्रा का पुण्य मिल जाता है। घर-दुकान में कोई वास्तुदोष हो, तो तोड़-फोड़ करने की बजाय बीचो-बीच नवकार मंत्र का पट्ट लगा दें, वास्तुदोष खत्म हो जाएगा।
अगर भूत-प्रेत या ऊपरी बाधा हो, तो कागज पर लिखे नवकार मंत्र का ताबीज सीधे हाथ पर बाँध दें, बाधा दूर हो जाएगी। जी मचलने लगे या तन में व्याधि हो जाए, तो गंगाजल कटोरी में लेकर तीन बार नवकार मंत्र पढ़ें और वह पानी पी लें, थोड़ी देर में ही शांति एवं सुकून मिल जाएगा। डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. ने नवकार महामंत्र का सामूहिक संगान करवाया। मोनिका-धर्मेश गांधी ने गुरु भक्ति पर सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। अवसर पर दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण का लाभ धर्म सभा में पधारे 65 साल के ऊपर के भाई-बहनों ने लिया।
अतिथि के तौर पर अखिल भारतीय खतरगच्छ युवा परिषद अध्यक्ष रमेश पारख, रोशन लाल पोकरणा, सुभाषचंद रांका, मंजूलता श्रीश्रीमाल का स्वागत विमल कुमार नाहर, मोतीलाल भलगट, उमेश बागरेचा, प्रदीप सुराणा, अमित मुणोत, पवन कुमार पांड्या, नवरतनमल गुंदेचा, अशोक कुमार नाहर, माणकचंद पोकरणा, विमल कुमार मुथा, प्रवीण सुराणा, चन्द्रप्रकाश लोढ़ा, शोभा देवी नाहर, शोभा रानी भलगट, आरती सुराणा, सूरज देवी गुंदेचा, लाड़ कंवर नाहर, सवीता मुथा, ललिता पोकरणा, हर्षा नाहर ने किया। मंच संचालन करते हुए महामंत्री अशोक कुमार नाहर ने बताया बुधवार, 6 अगस्त को 5 नियम जो बदल देंगे आपका जीवन विषय पर प्रवचन होगा।
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