हर सांसारिक वस्तु में रखें ईश्वरीय भावना : रमेशजी

हैदराबाद, हर सांसारिक वस्तु में हमारी भावना, ध्यान, भक्ति तथा दृष्टि ईश्वरीय तत्व पर ही होनी चाहिए। जीवन की विभिन्न स्थितियों तथा आत्मकल्याण के लिए परमात्मा को पुकारने के स्थान पर उससे अपना जुड़ाव स्थापित करना चाहिए। उक्त उद्गार बंजारा हिल्स स्थित अवर पैलेस में आयोजित भगवान नृसिंह जयंती तथा बुद्ध पूर्णिमा विशेष सत्संग को संबोधित करते हुए रमेशजी ने व्यक्त किए। रमेशजी ने कहा कि पौराणिक अवतारों से आज भी प्रासंगिक जीवन संदेश मिलते हैं।

जीवन में कई ऐसी समस्याएँ आती हैं, जिनका समाधान नजर नहीं आता। ऐसे समय में जब हम उसे ब्रह्मांड या दिव्य परमसत्ता पर छोड़ देते हैं, तो वह समाधान निकालने के हजारों रास्ते तलाश लेती है। परमसत्ता के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जहाँ पर हम रुक जाते हैं, उसके परे उसे चेतना के पास करोड़ों समाधान होते हैं। भक्त प्रह्लाद का उदारहण देते हुए रमेशजी ने कहा परमसत्ता के आगे सभी प्रकार की परस्थितियों को हार माननी पड़ती है।

प्रह्लाद ने विकट से विकट स्थिति में भी नारायण के दर्शन किए थे, जिसके कारण नारायण को प्रकट होना पड़ा। इससे संदेश मिलता है कि अगर हम दुश्मन में या हमारा नाश करने वाले में भी नारायण या परमब्रह्म के दर्शन करेंगे, तो उसके भीतर से परमात्मा प्रकट होकर उस दुश्मन की दुश्मनी को नष्ट कर सकते हैं।

सच्चे भक्त को हर जगह ईश्वर के दर्शन

रमेशजी ने कहा कि हर वस्तु में हमारी भावना, ध्यान, भक्ति तथा दृष्टि ईश्वरीय तत्व पर रखते हुए उससे अपना हॉटलाइन जैसा जुड़ाव बनाकर रखना चाहिए। साथ ही नारायण की सर्वभक्ति में लीन रहना चाहिए। जो इंसान वास्तविक रूप में ईश्वर की भक्ति में होता है, उसे संसार में कुछ भी भौतिक वस्तुएँ न दिखते हुए सर्वत्र समानता तथा सर्व शक्तिमान परमात्मा के दर्शन करता है।

हमें बाहर नहीं वरन भीतर के अहं में अहं ब्रहास्मि की स्थापना कर लेनी चाहिए, इससे ब्रह्म प्रकट हो जाएगा और बाहर की यात्रा समाप्त हो जाएगी। जन-कल्याण के लिए बुद्ध तथा नृसिंह अवतार से जुड़े प्रसंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें शांति सरोवर-सा बनने का प्रयास करना चाहिए।

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गुरु माँ ने कहा कि भगवान नृसिंह तथा बुद्ध सभी के जीवन कष्टों तथा अड़चनों से पार लगाएँ। यह दोनों अवतार ही हमें ज्ञान और मुक्ति देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि हम भी सच्ची भक्ति के माध्यम से भगवत कृपा के पात्र बन सकते हैं। हम सबके पास इच्छा शक्ति होती है, जिसके माध्यम से हमें जीवन की हर समस्या में नारायण यानी चेतना के दर्शन करने चाहिए। समस्या का स्वमेव समाधान मिल जाएगा। साथ ही हमें नृसिंह अवतार जैसा सुरक्षा कवच मिल जाएगा।

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