उसी तरह बल्लेबाजी की कोशिश की जैसी बचपन में करता था – गिल
बर्मिंघम, इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार दोहरा शतक जड़ने वाले भारत के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि उन्होंने बल्लेबाजी के दौरान अपनी पुरानी शैली को फिर से अपनाया और इस पारी में उन्होंने लय और आनंद दोनों पर ध्यान केंद्रित किया।
गिल ने 387 गेंदों पर 269 रनों की मैराथन पारी खेली और इंग्लैंड में टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई कप्तान बन गए। इससे पहले लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में भी उन्होंने शतक जड़ा था।


श्रृंखला से पहले तकनीक में किसी तरह का बदलाव करने के सवाल पर गिल ने मेजबान प्रसारक से कहा,
“मैंने आईपीएल के अंत और इस श्रृंखला से पहले अपनी तकनीक पर काफी मेहनत की। खास तौर पर अपने शुरुआती मूवमेंट पर। पहले मुझे लगता था कि मैं ठीक बल्लेबाजी कर रहा हूं – लगातार 30, 35, 40 रन बना रहा था – लेकिन कहीं न कहीं टॉप फोकस टाइम की कमी महसूस हो रही थी।”
गिल ने आगे कहा,
“कई लोग कहते हैं कि अगर आप जरूरत से ज्यादा फोकस करते हैं, तो वह सही समय पर टिक नहीं पाता। इस श्रृंखला में मैंने अपने बेसिक्स पर लौटने की कोशिश की। मैंने फिर से वैसे ही खेलने की कोशिश की जैसे बचपन में करता था – रन बनाने के बजाय बल्लेबाजी का मजा लेने पर ध्यान दिया।”

गिल ने स्वीकार किया कि रन न बनने पर वह दबाव में आ जाते थे,
“कई बार जब आप रन के प्रवाह में नहीं होते, तो बल्लेबाजी का मजा खत्म हो जाता है। आप सिर्फ स्कोर पर फोकस करने लगते हैं। मैंने भी ऐसा ही किया और महसूस किया कि मैं बल्लेबाजी का आनंद लेना भूल गया था।”
गिल ने अंत में कहा,
“पिछले मैच में मैंने प्रवाह के साथ खेला, लेकिन इस बार परिस्थितियां आसान नहीं थीं। मैंने सोचा कि अगर विकेट अच्छी है और मैं सेट हो गया हूं, तो मैं लंबी पारी खेलूंगा और मैच को बीच में नहीं छोड़ूंगा।” (भाषा)
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