मंत्रों से पाएं अक्षय सुख, शांति और समृद्धि : रमेशजी

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हैदराबाद, सृष्टि की उत्पत्ति ध्वनि की तरंगों से हुई है और ये ध्वनि तरंगें ही अक्षर हैं। अक्षय सुख, शांति और समृद्धि का स्रोत है अक्षरों से निर्मित मंत्र। हमारे हाव-भाव, आचार-व्यवहार, विचार, सोच तथा मन से जाने-अनजाने जो भी तरंगे निकलती हैं, वह ब्रह्मांड में चारों ओर फैल जाती हैं और वही दूसरी तरंगों से टकराकर वापस हमारे पास आती हैं। इसलिए हमें सजग रहकर सकारात्मक व संतुष्ट रहना है। संतोष जीवन का परम धन है और यह ऐसा विशेष धन है जो अक्षय सुख शांति और समृद्धि को आकर्षित करता है।

रोड नं. 10, बंजारा हिल्स स्थित अवर पैलेस में आदि शंकराचार्य जयंती विशेष सत्संग को संबोधित करते हुए सद्गुरु रमेशजी ने ॐकार के गुप्त रहस्य को प्रकट किया तथा सभी उपस्थित साधकों के भीतर अक्षय ज्ञान और सुख समृद्धि हेतु स्वामी पूर्णानंदजी द्वारा दिया गया दिव्य मंत्र ध्यान और जप द्वारा स्थापित किया।

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अपने जीवन के अक्षय पात्र को हम बड़ों की सेवा, सम्मान करके, उनको दो मीठे शब्द बोलकर आसानी से भर सकते हैं, यह ज्ञान गुरु माँ ने दिया। आशीर्वाद की कमाई करने के साथ-साथ आशीर्वाद हमें खुले दिल से देना भी चाहिए इस रहस्य को उन्होंने प्रकट किया। दिव्य नृत्य, मंत्र जैमिंग, गुरु दर्शन तथा कृपा का सभी उपस्थित साधकों ने लाभ उठाया।

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