मिलर्स के खिलाफ खारिज न हों मामले, सरकार का कोर्ट से आग्रह
हैदराबाद, सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया कि धान की हेराफेरी के आरोप में राज्य भर के 360 मिल मालिकों के खिलाफ दर्ज मामले खारिज नहीं किए जाने चाहिए। लगभग 360 धान मिल मालिकों ने धान की हेराफेरी के आरोप में सरकार द्वारा दर्ज आपराधिक मामलों को खारिज करने की माँग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की हैं।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास राव ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की। लोक अभियोजक पल्ले नागेश्वर राव ने दलील देते हुए कहा कि धान की हेराफेरी के अलावा, उन्होंने सरकार को धान के भंडार के बराबर 3,960 करोड़ रुपये का बकाया भी नहीं चुकाया है। उन्होंने कहा कि मिल मालिकों ने जान-बूझकर सरकार को देय राशि का भुगतान नहीं किया है।
नागेश्वर राव ने कहा कि इससे सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर असर पड़ा है क्योंकि भारी मात्रा में बकाया जमा हो गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने धान की हेराफेरी से प्राप्त आय से फिल्म निर्माण और रियल इस्टेट व्यवसायों में निवेश किया और चल और अचल संपत्तियाँ खरीदीं। उन्होंने कहा कि इन निधियों का उपयोग परिवार के सदस्यों के नाम पर नई मिलें स्थापित करने में भी किया गया।
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नागेश्वर राव ने कहा कि इसी प्रकार के बिहार के मिल मालिकों से संबंधित एक समान मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
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