कालेश्वरम को लेकर हरीश राव आयोग के समक्ष पेश
हैदराबाद, पूर्व मंत्री और बीआरएस विधायक हरीश राव ने कहा कि तेलंगाना के लोगों को यह बात समझ में आ चुकी है कि कालेश्वरम तेलंगाना की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि कालेश्वरम आयोग के समक्ष मौखिक रूप से कुछ नहीं बल्कि सभी सबूतों के साथ सब कुछ पेश किया गया। हरीश राव ने बताया कि मंत्रिमंडल के सभी निर्णय, वापकोस की रिपोर्ट और सीड्ब्यूसी के पत्र आदि सब पेश किये गये। हरीश राव आज कालेश्वरम आयोग के समक्ष पेश हुए।
जस्टिस पीसी घोष ने उनसे लगभग 40 मिनट तक पूछताछ की। हरीश राव ने आयोग को परियोजना के री-डिजाइनिंग करने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और सीडब्ल्यूसी की आपत्तियों के कारण री-डिजाइनिंग करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि तुम्मिडिहट्टी में पानी की उपलब्धता की समस्या के कारण परियोजना का री-डिजाइनिंग किया गया। उन्होंने आयोग को समझाया कि वास्कोप के माध्यम से सर्वेक्षण किए जाने के बाद ही परियोजना स्थल बदला गया था।
परियोजना स्थल बदलाव के पीछे तकनीकी और नीति कारण
जब जस्टिस पीसी घोष ने मेडिगड्डा, अन्नारम और सुंदिल्ला बैराजों के बारे में सवाल किया, तो हरीश राव ने कहा कि सभी बांधों के निर्माण को मंत्रिमंडल की मंजूरी थी। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों की सलाह पर अन्नारम और सुंदिल्ला बैराज को स्थानांतरित किया गया था। हरीश राव ने बताया कि सेवानिवृत्त इंजीनियरों ने कहा था कि मेडिगड्डा से सीधे एल्लमपल्ली में स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। उनकी सलाह पर स्थान बदला गया था।
कालेश्वरम आयोग की जाँच समाप्त होने के बाद हरीश राव ने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि जाँच के दौरान तुम्मिडिहट्टी पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि उनसे पूछा गया कि तुम्मिडिहट्टी से मेडिगड्डा को बैराज क्यों स्थानांतरित किया गया। जवाब में उन्होंने बताया कि नवगठित तेलंगाना सरकार ने तुम्मिडिहट्टी के पास परियोजना के निर्माण के लिए सभी तरह के प्रयास किया। इससे संबंधित विवरण आयोग को बता दिया गया। महाराष्ट्र ने स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी हाल में तुम्मिडिहट्टी के पास 152 मीटर की ऊंचाई पर परियोजना का निर्माण को स्वीकार नहीं करेगा।
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मेडिगड्डा परियोजना: पानी, राजनीति और नीति की दिशा
तुम्मिडिहट्टी के पास परियोजना के निर्माण के लिए महाराष्ट्र और तेलंगाना सरकारों के बीच पांच या छह बैठकें हुईं। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सात साल तक केंद्र, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में सत्ता में रही, लेकिन उसने एक भी अनुमति प्राप्त नहीं की। एक भी अंतर्राज्यीय समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया। एक एकड़ भूमि का भी अधिग्रहण नहीं किया। कांग्रेस सरकार तुम्मिडिहट्टी में परियोजना के निर्माण में पूरी तरह विफल रही।
इस बीच केंद्रीय जल आयोग ने परियोजना के निर्माण के लिए विकल्प तलाशने के लिए एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि तुम्मिडिहट्टी में पानी की उपलब्धता नहीं है। इसी तरह सीडब्ल्यूसी ने भी जलाशयों की क्षमता को बढ़ाने की सलाह दी। इस संदर्भ में केसीआर ने केंद्र सरकार की एजेंसी वापकोस को बैराज निर्माण स्थल का चयन करने का अनुरोध किया। वापकोस ने एक सर्वे और जाँच की और कहा कि मेडिगड्डा में पानी की उपलब्धता है और वहाँ परियोजना का निर्माण किया जा सकता है।
हरीश राव ने कहा कि उन्होंने आयोग को बताया कि वापकोस, सीडब्ल्यूसी और इंजीनियरों के सुझावों के अनुसार मेडिगड्डा में परियोजना का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने परियोजना का प्रस्ताव जहाँ पानी नहीं था वहा रखा, तो बीआरएस सरकार ने जहाँ पानी था वहाँ परियोजना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि आयोग को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री द्वारा लिखे गए सभी पत्र तथा सरकारी आदेश सौंपे गए। उन्होंने कहा कि कालेश्वरम निगम का गठन केवल परियोजना के लिए ऋण एकत्र करने के लिए किया गया था। निगम का गठन कैबिनेट की मंजूरी और सरकारी गारंटी के साथ किया गया था। यह बात भी आयोग को बतायी गयी।
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