स्वास्थ्य ही असली धन है

स्वास्थ्य ही असली धन है। यह कहावत आज भी सर्वथा उचित प्रतीत होती है, क्योंकि जिसका शरीर स्वस्थ है, वही स्वस्थ कार्य कर सकता है। इसीलिए हम अपने प्रियजनों के लिए सदा स्वस्थ रहने की कामना रखते हैं। कोई भी व्यक्ति बीमार होकर अपनी मेहनत की कमाई डॉक्टर और दवाइयों के पीछे जाया करना नहीं चाहते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, मनुष्य वास्तविक रूप से तभी स्वस्थ कहलाता है, जब वह स्वयं को मानसिक, भौतिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक स्तर पर स्वस्थ अनुभव करें, किंतु, दुर्भाग्य से आधुनिक जगत की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास पर्याप्त समय ही नहीं है कि वह अपने स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर कराते रहें। इसलिए कुछ लोग स्वस्थ दिनचर्या को अपनाकर रोगों से दूर रहने की कोशिश करते हैं, किन्तु उनका यह प्रयास अनेक प्रकार के सामाजिक दबाव के कारण उतना सफल नहीं हो पाता है और अंततोगत्वा निराश होकर वे अस्वस्थ जीवन शैली को अपना लेते हैं।
हम जंक फूड, जरूरत से ज्यादा खाना और उचित आराम न करना, भावनात्मक अस्थिरता, धूम्रपान और मद्यपान जैसी अनेक गलत आदतों में फंसे हैं। हमें इस बात का एहसास तक नहीं होता कि इन आदतों का हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रश्न यह उठता है कि एहसास करने के लिए इतना दूर क्यों जाना? ऐसे दर्द और पीड़ा से गुजरना क्या वास्तव में समझदारी है? नहीं ना! तो क्यों न एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाया जाए? यदि अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए कुछ परिवर्तन अपनी दिनचर्या में करें तो हम एक समग्र संतुलित स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
ध्यान और मेडिटेशन से दूर करें नकारात्मकता
मसलन, जल्दी सोना एवं जल्दी उठना, इस आदत को यदि हम गंभीरता से अपना लें, तो प्रातकाल से लेकर रात्रि तक हमारा दिन बहुत अच्छा जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में किये गए चिकित्सा अनुसंधानों के द्वारा यह तथ्य सामने आया है कि अध्यात्म मानव चरित्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उसके भावनात्मक पक्ष को प्रभावित करता है। अत उसकी उपेक्षा करना नुकसान कारक सिद्ध हो सकता है।

इसलिए विश्वभर के चिकित्सक आज दवा के साथ-साथ अपने मरीजों को ध्यान करने की सख्त राय देते हैं, क्योंकि उनका स्पष्ट मानना है कि ध्यान के द्वारा मनुष्य अपने प्रतिदिन की नकारात्मकता से दूर रहेंगे, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य की बेहतरी में भी सहायक होगा। याद रहे! पहला सुख निरोगी काया अर्थात यदि आपका स्वास्थ्य ही ठीक नहीं है तो जीवन के अन्य सुख-समृद्धि का कोई औचित्य ही नहीं रहेगा। इसलिए समय रहते अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी अपने हाथ में लें।
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