हिल्ट भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का ऐतिहासिक कदम : श्रीधर बाबू
हैदराबाद, आईटी एवं उद्योग मंत्री श्रीधर बाबू ने कहा कि औद्योगिक भूमि रूपांतरण से संबंधित हैदराबाद इंडस्ट्रियल लैंड ट्रांसफॉर्मेशन (हिल्ट) नीति केवल भूमि रूपांतरण (लैंड कन्वर्ज़न) नहीं, बल्कि यह भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का ऐतिहासिक कदम है।
विधानसभा में विशेष चर्चा के दौरान मंत्री श्रीधर बाबू ने कहा कि हिल्ट नीति का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से आवासीय क्षेत्रों में बदलना है। मुख्यमंत्री का संकल्प है कि आउटर रिंग रोड के भीतर प्रदूषण को कम कर उद्योगों को इसके बाहर स्थानांतरित किया जाए। इसे लागू करने से पहले इस पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इस बात को भी स्पष्ट किया गया कि सरकार आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए हर संभव सहयोग करेगी।
श्रीधर बाबू ने सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि कई लोग हिल्ट नीति को ठीक से समझे बिना ही आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि उद्योगपतियों की ज़मीन सरकारी संपत्ति है। उन्होंने पूर्व सरकार के आदेश का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि सरकार को केवल लीज़ पर दी गई जमीनों पर अधिकार प्राप्त है।
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प्रदूषण नियंत्रण और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा
उद्योग मंत्री ने कहा कि यदि उद्योगपति स्वेच्छा से आगे आते हैं, तो सरकार उन जमीनों के रूपांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाएगी। सरकार का प्रमुख लक्ष्य नागरिकों को प्रदूषण से बचाना और सभी फैसले वैज्ञानिक सोच, तर्कसंगत आधार और भविष्य को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। यह नीति पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय सूचना क्रांति के दौर से गुजर रही है, लेकिन तकनीकी प्रगति की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। हम अंतरिक्ष में घर बनाने के सपने देख रहे हैं, लेकिन धरती पर लोगों को स्वच्छ हवा, साफ पानी और सुरक्षित भोजन जैसे बुनियादी अधिकार नहीं दे पा रहे हैं। विकास के नाम पर हो रहे पर्यावरणीय विनाश पर गंभीर आत्ममंथन आवश्यक है।
मंत्री ने विधानसभा को याद दिलाया कि पिछली पीढ़ियों ने हमें हरे-भरे खेत, स्वच्छ नदियाँ और शुद्ध हवा सौंपी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्तमान पीढ़ी वही विरासत अपने बच्चों को सौंप रही है। अगर भविष्य की पीढ़ियों को प्रदूषित हवा और ज़हरीला पानी ही मिला, तो धन या ऊँची इमारतें बनाने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। बच्चों को दौलत के साथ ज़हर देना, सोने के कटोरे में ज़हर परोसने जैसा है। इंसान इस धरती का मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण देना कोई एहसान नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। यदि पर्यावरण विनाश इसी तरह जारी रहा, तो बच्चों को एक पारिस्थितिक रेगिस्तान में जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
पिछले 50 वर्षों में बदल गये हैं शहर के कई इलाके
हिल्ट नीति के औचित्य को समझाते हुए श्रीधर बाबू ने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार ने आलोचनाओं और छिपे एजेंडे के आरोपों के बावजूद यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल राजस्व रिकॉर्ड बदलने या औद्योगिक भूमि को आवासीय क्षेत्र में बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ आधार तैयार करने की दिशा में ठोस कदम है।
मंत्री ने कहा कि 1970 के दशक में आईडीपीएल जैसे उद्योगों के साथ शहर की औद्योगिक यात्रा शुरू हुई थी। उस समय बालानगर, सनतनगर, उप्पल, जीडिमेट्ला और चेर्लापल्ली जैसे क्षेत्रों को शहर से दूर विशेष औद्योगिक ज़ोन के रूप में विकसित किया गया, लेकिन पिछले पाँच दशकों में हैदराबाद एक वैश्विक महानगर बन गया। जो इलाके कभी शहर से बाहर थे, वह अब शहर के केंद्र बन चुके हैं।
आज स्थिति यह है कि आवासीय कॉलोनियाँ सीधे फैक्ट्रियों की दीवारों से सटी हुई हैं और बफर ज़ोन खत्म हो जाने के कारण ज़हरीला प्रदूषण सीधे लोगों के घरों में प्रवेश कर रहा है। हिल्ट नीति विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच दशकों पुराने असंतुलन को सुधारने की दिशा में सरकार का पहला निर्णायक कदम है। उन्होंने विपक्ष से अनुरोध किया कि इस नीति पर सकारात्मक रूप से विचार करें और सरकार को उत्तम सुझाव दें।
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