पर्सनल हाइजिन के प्रति आप कितने सचेत हैं

देखा जाए तो अधिकांश लोग अपनी पर्सनल हाइजिन के प्रति लापरवाह होते हैं, जिसके अभाव में छोटी-बड़ी बीमारियों को बिना बुलाए आमंत्रण मिल जाता है। आपको आश्चर्य होगा कि हाइजिन शब्द यूनान की देवी के नाम पर लिया गया है। पर्सनल हाईजिन का सीधा-सा अर्थ है व्यक्तिगत स्वास्थ्य का ध्यान रखना। हाइजिन नाम पवित्र देवी के नाम पर होने से पर्सनल हाइजिन की महत्ता स्वयं ही सुस्पष्ट हो जाती है।

मनुष्य के स्वास्थ्य पर वंश तथा वातावरण का प्रभाव खासतौर से पड़ता है। अच्छे स्वास्थ्य हेतु दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए निम्नलिखित बातों पर सजगता रखनी होगी। मनुष्य को अच्छे स्वास्थ्य हेतु स्वयं पर संयम रखना होगा जिसमें निद्रा, नशीले पदार्थों का सेवन, उत्तेजक पेय, नित्य क्रियाओं की आदत, व्यायाम, वस्त्र, भोजन की बातें सम्मिलित की जाती हैं। शरीर, वस्त्र, भोजन तथा वातावरण की स्वच्छता ज़रूरी है।

  • नींद शरीर को स्वस्थ रखने तथा थकावट भगाने की औषधि है। वयस्कों हेतु 8 घंटे तथा बच्चों हेतु 12-14 घंटे नींद पर्याप्त है। वैसे अधिक निद्रा से दिमागी शिथिलता तो अल्पनिद्रा से चिड़चिड़ापन तथा एकाग्रता में कमी होती हैं। खाने के तुरंत बाद सोने से मंदाग्नि व अपच होती है।
  • अफीम, चरस, नींद की गोलियों से हृदयरोग, रक्तचाप, अनिद्रा रोग हो सकते हैं। नशीले पदार्थों से स्नायु ढीले होते हैं, चक्कर आते हैं। उत्तेजक पेयों में चाय, काफी, कहवा, धूम्रपान, तम्बाकू भी पर्सनल हाइजिन को ख़तरा पहुंचाते हैं। इनसे भी स्नायु रोग व अनिद्रा रोग हो सकते हैं।
  • प्रतिदिन निश्चित समय पर शौच जायें नहीं तो मितली, सिरदर्द व स्वाद में कमी हो सकती हैं। वैसे शौच जाने से पहले कुल्ला कर खाली पेट पानी पीना अच्छा है।
  • पर्सनल हाइजिन के लिए व्यायाम भी ज़रूरी है। याद रखें, खाने के तुरंत बाद व्यायाम करना हानिकारक हैं। व्यायाम से फेफड़े मज़बूत और प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि होती है।
  • आपके चलने-फिरने, उठने-बैठने की मुद्रायें भी चुस्त और आकर्षक होनी चाहिए।
  • वस्त्र शरीर से हटकर हैं, परन्तु इनसे सौंदर्य की वृद्धि तथा मानसिक प्रसन्नता प्राप्त होती है। ऊनी वस्त्रां का प्रयोग सर्दी में करें जो ताप के कुचालक हैं। गीले वस्त्र गठिया और दाद को निमंत्रण देते हैं।

आहार

  • भोजन पौष्टिक एवं संतुलित होना चाहिए। आप हरी सब्ज़ियां खाएँ तथा खाने के बाद ज्यादा पानी न पिएं।
  • आंखों को शीतल पानी से धोना चाहिए। पढ़ने के लिए आंख और पुस्तक की दूरी 10-12 इंच होनी चाहिए।

मुंह:-

  • दांत और नाखूनों की सफाई भी अनिवार्य है। मुंह-दांत साफ न करने से पायरिया रोग हो सकता है। दांत के साथ मसूड़ों की मालिश करने से दंतक्षय रुकता है। बड़े नाखून जाने-अनजाने में सैकड़ों हानिकारक सूक्ष्म जीवाणु आपके पेट में पहुंचा देते हैं, जिससे कृमि होने की संभावनायें बढ़ जाती हैं।
  • त्वचा और शरीर की सफाई भी प्रतिदिन होनी चाहिए। इसके लिए शीतल जल स्नान, कुनकुने पानी से स्नान, सूर्य स्नान कोई भी लाभदायक विधि चुनी जा सकती है। सूर्य स्नान में मालिश करने के बाद ठंडे जल से नहाएं। जांघ, कॉख के साथ लिंग की सफाई भी ज़रूरी है। लिंग के शिश्न पर जमा पदार्थ स्त्रा में गर्भाशय कैंसर को बढ़ावा देता है।
    अच्छे स्वास्थ्य के लिये भोजन भी स्वच्छ होना चाहिए। आप कच्चे फल खाने के पहले साफ जल से कई बार या पोटेशियम परमेगनेट से धोकर खायें। शीतल जल और बर्फ पर्सनल हाइजिन के लिये घातक हैं।
    व्यक्तिगत स्वास्थ्य में हाइजिन रखने के साथ रोगों का बचाव भी होना चाहिये। इसके लिए समय-समय पर प्रतिरक्षक टीके लगवाने चाहिए। यदि आप जहां रहते हैं, उस स्थान पर वायरस फीवर, दण्डक फीवर, गर्दन तोड़ फीवर, कंजेक्टिवाइटिस ज्वर का प्रकोप फैला हो तो तरूणताल, जिम, होटल जैसे सार्वजनिक स्थलों से बचें।
    पर्सनल हाइजिन की सारी तामझाम को अपनाने एवं दोहराने के बाद भी आप स्वस्थ नहीं रहेंगे जब तक कि आप सदा प्रसन्नचित, चिंतामुक्त नहीं रहेंगे। अपने आप पर तथा ईश्वर में विश्वास रखें।

राकेश कुमार

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