खतरनाक दहलीज पर ईरान-इजराइल जंग

रूथ डी जोंग डच मूल की यहूदी लेखिका हैं और दूरवर्ती ऊपरी गलील में लगभग साढ़े छह हजार की जनसंख्या के द्रूज बहुल कस्बे पेकी इन में पहाड़ी ढलान के अपने कंदरानुमा घर में रहती हैं। कोविड में वह अपने पति को खो चुकी हैं। उनका बेटा फौज में है। लाम पर जूझते हुये। कहती हैं -गनीमत है कि मैं पेकी इन में हूँ। यहां खतरा कम है, लेकिन निरापद कोई नहीं है। साइरन जब-तब बज उठता है। परसों रात यहां भी रॉकेट के टुकड़े गिरे। जलते हुये अंगारे। राजधानी तेलअवीव में खतरा ज्यादा है। उन्होंने तस्दीक की कि हैफा बंदरगाह ईरान के हमले की ज़द में है। तबाही के मंजर देखे जा सकते हैं।

अब इस बात की पुष्टि हो गई है कि ईरान के खिलाफ जंग में इजराइल के सहयोगी के तौर पर अमेरिका का पर्दापण हो गया है। शनिवार रात देर गये अमेरिका के आधुनिकतम बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों ने 18 घंटों के अभियान में ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बम गिराये। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आदेश पर हुये इस उच्च वर्गीकृत मिशन की जानकारी वाशिंगटन में इने-गिने लोगों को ही थी। बी-2 अकेला बमवर्षक है, जो जीबीयू 57 एबी ले जा सकता है।

ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला

इसमें प्रयुक्त तीक्ष्ण भेदी बंकर बस्टर पथरीली जमीन में भी करीब दो सौ फुट गहरे धँस कर लक्ष्य को नष्ट कर सकता है। इस मिशन के निशाने पर थे ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित आण्विक ठिकाने। तेहरान से 100 किमी दक्षिण पश्चिम में फोर्दा अड्डा पर्वत की तली में स्थित था। सन् 2009 में स्थापित इस ठिकाने की रक्षा पंक्ति इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्डों के हाथों में थी।और बतौर कवच रूस की एस-300 प्रणाली तैनात थी, सन् 2015 में इसे बंद किया गया था, किंतु सन् 2018 में ट्रंप के संधि से विलग होने पर फिर प्रारंभ कर दिया गया था।

यूरेनियम परिवर्द्धन की बात करें तो तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित नतांज अड्डे को क्राउन ज्वेल की संज्ञा दी जाती थी। यहां करीब 50,000 सेंट्री फ्यूजों का जखीरा था। ऐसे ही ऐतिहासिक शहर इस्फहान में विशालतम परमाणु केन्द्र सन् 1984 में चीन के सहयोग से स्थापित हुआ था। तेहरान से 350 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस केन्द्र में करीब 3000 परमाणु वैज्ञानिक काम करते थे। ये तीनों संयंत्र ईरान के परमाणु-कार्यक्रम के प्राण तत्व थे।

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ईरान-अमेरिका तनाव पर युद्ध के बादल गहराए

हैरत की बात है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दो हफ्ते की मोहलत के अपने बयान के 48 घंटे बाद ही इस अति-गोपनीय अभियान को हरी झंडी दे दी। अभियान की सफलता से गद्गद ट्रंप ने अमेरिकी लड़ाकों की पीठ थपथपाई और इजराइल के पीएम नेतन्याहू के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा – या तो अब अमन होगा या फिर ईरान तबाह। नेतन्याहू ने टिप्पणी की – यह इतिहास बदल देगा। अमेरिकी रक्षा-सचिव ने कहा – जब यह राष्ट्रपति बोले तो सारी दुनिया को सुनना चाहिये। अमेरिका के स्थायी सहयोगी इंग्लैंड के पीएम स्टार्मर, जार्डन के नरेश अब्दुला द्वितीय और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने साझा बयान में ईरान से वार्ता की मेज पर आने को कहा।

इस्फहान प्रांत के गवर्नर के सलाहकार अकबर सालेही ने तीनों ठिकानों पर अमेरिकी धावे की तस्दीक कर दी है। लेकिन ईरानी टीवी ने कहा है कि ठिकाने पहले ही खाली किये जा चुके थे। विदेश मंत्री अब्बास अरागाची ने कहा कि हम जवाब देंगे। टीवी पर ऐलान हुआ कि अमेरिका के सारे ठिकाने ईरान की ज़द में हैं। ईरानी नेताओं ने कहा अब हर अमेरिकी नागरिक ईरान के हमले की परिधि में है।

डॉ. सुधीर सक्सेना
डॉ. सुधीर सक्सेना

यह भी खबर है कि पनडुब्बी से इस्फहान पर दो दर्जन से ज्यादा तोमाहाक क्रूज मिसाइलें दागी गयीं। उधर तुर्की के प्रधानमंत्री एर्दोगन ने नेतन्याहू को आधुनिक हिटलर बताया और कहा कि इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन किया है। आसार खराब हैं और ट्रंप की बेताबी से जंग नये दौर में प्रवेश कर गयी है। ईरानी नेता ने मिस्टर ट्रंप, यू स्टार्टेड इट एण्ड वी विल एंड इट कहकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं ओर शांति वार्ता की पेशकश ठुकरा दी है। यकीनन जंग खतरनाक देहरी पर है।

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