भविष्यगत उपचार प्रणालियों को पुनर्गठित करेगा आईएसडीई इंडिया : नंदमुरी बालकृष्णा

हैदराबाद, बसवतारकम् इंडो अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (बीआईएसी एंड आरआई) की मेजबानी में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर डिजीज ऑफ द एसोफेगस (आईएसडीई) इंडिया एडिशन-2026 आज हाईटेक सिटी स्थित द वेस्टिन में आरंभ हुआ। ग्रासनली कैंसर के उपचार और अनुसंधान में हुई नवीनतम प्रगति पर आधारित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन एनबीटीआरएमसीएफ के अध्यक्ष तथा प्रबंध न्यासी नंदमुरी बालकृष्णा ने किया।

नंदमुरी बालकृष्णा ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आयोजन न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक मुख्य पड़ाव है, बल्कि यह बसवतारकम् अस्पताल के 25 वर्षों के अटूट समर्पण और सेवा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि इन दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों का मिलन भारत में कैंसर देखभाल की दिशा को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा, जहाँ विश्वस्तरीय उपचार केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर भारतीय का सुलभ अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि बसवतारकम् अस्पताल आज देश के सबसे व्यस्त ऑन्कोलॉजी केंद्रों में से एक है, जो उच्च-स्तरीय सर्जिकल प्रशिक्षण और नवाचार के साथ एक गैर-लाभकारी संस्थान के रूप में समाज के प्रति प्रतिबद्धता निभा रहा है।

यहाँ केवल चिकित्सा का अभ्यास नहीं होता, बल्कि विज्ञान और मानवता के मेल से मरीजों को उम्मीद देने का एक वादा निभाया जाता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन केवल प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नए विचारों का एक ऐसा केंद्र बनेगा, जो भविष्य की सर्जरी और उपचार प्रणालियों को पुनर्गठित करेगा। भारत अब वैश्विक चिकित्सा चर्चाओं में केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि हमारा अनुभव और हमारे वैज्ञानिकों की प्रतिभा दुनिया को नया रास्ता दिखा रही है।

भारतीय विशेषज्ञता की वैश्विक स्तर पर हुई सराहना

आईएसडीई के अध्यक्ष प्रो. लोरेंजो फेरी ने ग्रासनली कैंसर के उपचार में भारतीय विशेषज्ञता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह एक घातक बीमारी है, जिसमें सटीकता की बहुत आवश्यकता होती है। भारत ने इसके प्रबंधन में जो नैदानिक कौशल दिखाया है, वह पूरी दुनिया के लिए सीखने योग्य है। उन्होंने कहा कि भारत के जमीनी अनुभवों को यदि पश्चिमी देशों और जापान की आधुनिक उपचार पद्धतियों के साथ जोड़ दिया जाए, तो कैंसर के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि भले ही उपचार के तरीके क्षेत्रीय आधार पर अलग हों, लेकिन साझा प्रयासों से ही हम मरीजों के लिए एक अधिक मजबूत और मानकीकृत चिकित्सा व्यवस्था की ओर बढ़ सकते हैं।

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई के निदेशक डॉ. सी.एस. प्रमेश ने कैंसर के बढ़ते मामलों के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य ग्रासनली कैंसर पर शोध को आगे बढ़ाना है, ताकि न केवल भारत में बल्कि विश्वस्तर पर उपचार के परिणामों में सुधार किया जा सके। बीआईएसी एंड आरआई ट्रस्ट बोर्ड सदस्य नारा ब्राह्मणी ने संस्थान की रजत जयंती पर संस्थापक एन.टी. रामाराव के विजन को याद करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में यह अस्पताल सामाजिक और आर्थिक भेदभाव से परे सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार सुलभ कराने के मिशन में सफल रहा है।

यह भी पढ़ें… फिक्की ने आयोजित किया नेट जीरो फोरम का दूसरा संस्करण

ग्रासनली कैंसर में भारत का वैश्विक बोझ अधिक

बीआईएसी एंड आरआई के चिकित्सा निदेशक डॉ. टी. सुब्रमण्येश्वर ने कहा कि आईएसडीई की मेजबानी हैदराबाद में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता लाकर ग्रासनली के कैंसर के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की स्थिति को मजबूत करने का प्रतीक है। अवसर पर बताया गया कि ग्रासनली का कैंसर एक अत्यंत आक्रामक तथा घातक रोग है, जिसमें भारत का वैश्विक बोझ काफी अधिक है।

तंबाकू, शराब, गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग, खराब आहार, गर्म पेय पदार्थ, कुपोषण जैसे जोखिम कारकों से जुड़ा यह रोग आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर-पूर्व और कश्मीर में इसकी व्यापकता अधिक है। गंभीर स्वास्थ्य चुनौती हैं, जिसके लिए जागरूकता और उन्नत चिकित्सा तकनीकों की आवश्यकता है। इस संदर्भ में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर डिजीज ऑफ द एसोफेगस और बसवतारकम् इंडो-अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से शनिवार, 11 अप्रैल तक आयोजित होने वाले आईएसडीई इंडिया एडिशन में सिंगापुर, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका सहित सात देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ तथा संकाय सदस्य भारतीय विशेषज्ञों के साथ ग्रासनली कैंसर से जुडे विभिन्न पलहुओं पर चर्चा कर अनुसंधान विकास पर विचार साझा करेंगे।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button