छोटी उम्र से कला और शिल्प के प्रति प्रेम पैदा करना आवश्यक-रत्ना पाठक शाह

हैदराबाद, फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (एफएलओ) हैदराबाद चैप्टर द्वारा आज होटल आईटीसी कोहिनूर में `क्राफटिंगकैरेक्टर्स-शेपिंग स्टोरीज’ विषयक सत्र का आयोजन किया गया।

अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार, अभिनेत्री तथा कलाप्रेमी रत्ना पाठक शाह ने भाग लेते हुए छोटी उम्र से ही कला और शिल्प के प्रति प्रेम पैदा करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा बच्चों को स्कूलों से ही कला और शिल्प के बारे में सिखाया जाना चाहिए।

स्पष्टवादिता ने बनाया प्रभावशाली

रत्ना पाठक शाह ने एफएलओ हैदराबाद चैप्टर की अध्यक्ष प्रतिभा कुंडा के साथ क्राफ्टिंग कैरेक्टर्स-शेपिंग स्टोरीज विषय पर चर्चा करते हुए कि वे कहानीकारों के परिवार में पली-बढ़ी हैं, इसलिए यह कौशल उनके अंदर स्वाभाविक रूप से आया। उन्होंने कहा कि वे अलग और खास बनना चाहती थीं। विडंबना रही कि उन्हें अभिनेत्री बनने का विचार पसंद नहीं था, लेकिन अभिनेत्री बन गई। आगे उन्होंने कहा मैं अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करती हूँ। इस स्पष्टता ने मुझे प्रभावशाली बना दिया है।

फिल्म के विपरीत थिएटर चुनौतीपूर्ण कार्य

पटकथा लेखन के महत्व पर चर्चा करते हुए रत्ना पाठक शाह ने कहा यह कहानी कहने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। एक अच्छी पटकथा लिखना आसान नहीं है, इसमें समय, प्रयास और ऊर्जा लगती है।रत्ना पाठक शाह ने पति नसीरुद्दीन शाह केसाथ मिलकर स्थापित किए गए थिएटर समूह के बारे में बात करते हुए थिएटर की उद्यमशीलता की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा फिल्म के विपरीत थिएटर एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

रत्ना पाठक शाह ने घरेलू व्यवसाय के बारे में भी इस बात करते हुए कहा कि हस्तनिर्मित उत्पाद मशीनीकृत उत्पादों की तुलना में अधिक मूल्यवान होते हैं। कारीगर, शिल्पकार और महिलाएं अपने कौशल को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। अवसर पर उन्होंने दर्शकों को ब्रांडेड उत्पादों के बजाय हाथ से बने उत्पादों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

डोकरा शिल्प को पुनर्जीवित करेगा एफएलओ

प्रतिभा कुंडा ने अवसर पर स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कहानी कहने की शक्ति पर विशेष रूप से बलदिया। उन्होंने कहा यह सांस्कृतिक और उम्र की बाधाओं को पार करते हुए जुड़ाव, सहानुभूति और समझ को बढ़ावा देता है।साथ ही दुनिया और उसमें हमारे स्थान के बारे में हमारी धारणा को भी आकार देता है।

उन्होंने कहा इस साल एफएलओ आदिलाबाद से डोकरा कला की शक्तिशाली कहानी को सामने लाने की यात्रा पर निकला है। हमारा लक्ष्य जागरूकता,डिजाइन हस्तक्षेप और बाजार संबंधों के माध्यम से कारीगरों का समर्थन करके 4,000 साल पुराने डोकरा धातु ढलाई शिल्प को पुनर्जीवित करना है।

कार्यक्रम के दौरान डोकरा शिल्प उत्पादों का एक संग्रह प्रदर्शित कियागया। यहां रत्ना पाठक शाह ने तेलंगाना के प्राचीन डोकरा शिल्प को दर्शाते हुए एक विशेष रूप से क्यूरेट किए गए एफएलओ स्मृति चिन्ह का अनावरण भी किया।

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