जुबली हिल्स उप-चुनाव में मागंटी सुनीता ने दाखिल किया नामांकन

हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने कहा कि जुबली हिल्स विधानसभा उप-चुनाव दो व्यक्तियों या पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर शासन के 10 सालों में किए गए विकास और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार के दो सालों की अराजकता के बीच है।

जुबली हिल्स उप-चुनाव में भारास की ओर से प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक मागंटी गोपीनाथ की धर्मपत्नी मागंटी सुनीता ने आज नामांकन दाखिल किया। अवसरपर केटीआर भी मौजूद थे। इससे पूर्व भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए केटीआर ने कहा कि जुबली हिल्स उप-चुनाव में बीआरएस की जीत तेलंगाना में फिर से केसीआर की सरकार बनाने की बुनियाद डालेगी।

बीआरएस की विजय यात्रा इसी निर्वाचन क्षेत्र से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि दरअसल गत चुनाव में नगर हैदराबाद के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बीआरएस की जो जीत हुई है, इसका श्रेय बीआरएस के हैदराबाद जिला अध्यक्ष रहे मागंटी गोपीनाथ की मेहनत को ही जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी वर्गों के समर्थन से बीआरएस प्रत्याशी मागंटी सुनीता भारी बहुमत से विजय प्राप्त करेंगी। उन्होंने कहा कि 42 प्रतिशत बीसी रिजर्वेशन को लेकर धोखा खाए बीसी वर्ग बीआरएस को जिताने के इंतजार में हैं वहीं कांग्रेस के हाथों धोखा खाए अल्पसंख्यक मुसलमानों के लिए यह उप-चुनाव एक मौका है।

रेवंत सरकार को हराने के लिए वे भी इंतजार में हैं क्योंकि मंत्री मंडल में एक भी मुसलमान को स्थान नहीं दिया गया है। केटीआर ने कहा कि जुबली हिल्स की बहू मागंटी सुनीता की जीत के लिए राज्य की 1 करोड़ 67 लाख महिलाएं इंतजार कर रही हैं। उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस यह उप चुनाव हारने के बाद सबक लेकर ही सही महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये पेंशन का वादा निभाएगी।

बीसी संघों के बंद को समर्थन

भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री के. तारक रामाराव ने 18 अत्तूबर को बीसी संघों के आहूत बंद को संपूर्ण समर्थन जताया और कहा कि तेलंगाना आंदोलन की तर्ज पर बीसी रिजर्वेशन का मुद्दा यदि दिल्ली तक ले जाया गया तो तुरंत समस्या हल हो जाएगी।

भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में राज्यसभा सदस्य आर. कृष्णय्या के नेतृत्व में आज बीसी संघों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल केटीआर से मिला और बंद के लिए समर्थन मांगा। इस पर राव ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर बीआरएस का रवैया स्पष्ट है। पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव शासन के दौरान विधानसभा में दो बार बिल पारित करके केंद्र सरकार को भेजा, जो अभी भी लंबित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने भी हाल के विधानसभा सत्र में बीसी बिल पेश किया था।

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बीसी आरक्षण पर बीआरएस और केटीआर का समर्थन

उसे भी पारित करने बीआरएस ने संपूर्ण समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर पहले नेता थे जिन्होंने केंद्रीय मंत्री रहते समय आर. कृष्णय्या प्रतिनिधिमंडल को तत्कालीन प्रधानमंत्री से पिछड़ा वर्ग के अधिकारों के लिए मिलवाया था। उन्होंने कहा कि केसीआर ने ही केंद्र में बीसी वर्ग के लिए विशेष मंत्री विभाग गठित करने की मांग की थी। आरक्षण के लिए बीसी संघों के हर प्रयास का बीआरएस समर्थन देने में आगे रहेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कामारेड्डी डिक्लेरेशन में पिछड़ा वर्ग को जो 42 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया है उस पर बचने के उद्देश्य से समय-समय पर पलटने के प्रयास करती जा रही है। उन्होंने बीसी संघों को कांट्रैक्टों से लेकर हर क्षेत्र में बीसी वर्ग को 42 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग करने की सलाह दी। केटीआर ने कहा कि यदि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी नेता राहुल गांधी मिलकर प्रयास करें तो पिछड़ा वर्ग आरक्षण की समस्या एक मिनट में हल हो जाएगी परंतु दोनों राष्ट्रीय दल ऐसा करना नहीं चाहते हैं।

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