प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ध्यान : चन्द्रप्रभजी

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हैदराबाद, शांति, सिद्धि और प्रगति के द्वारों को खोलने का दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ध्यान है। इंसान जब-जब दुखी, चिंतित अथवा तनावग्रस्त हुआ, तब-तब ध्यान ने उसे समाधान का मार्ग दिया है। उक्त उद्गार सोहनलाल प्रेमचंद कटारिया द्वारा डबीरपुरा जैन स्थानक में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु भाई बहनों को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत चन्द्रप्रभजी महाराज ने दिये।

यहां लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा एवं महामंत्री अशोक कुमार नाहर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संतश्री ने कहा कि महावीर और बुद्ध जैसे महापुरुषों ने ध्यान के माध्यम से ही परम सत्य को प्राप्त किया। यदि आप शांति-पथ का आनंद लेना चाहते हैं, तो कृपया हर रोज सुबह-शाम 20 मिनट तक शांत मंद श्वांस लेते हुए उनका ध्यान कीजिए। यह धारणा रखिए कि मैं श्वांस को शांत करते हुए अपने अन्तर्मन और उसकी उत्तेजनाओं को शांतिमय बना रहा हूँ।

शुरू में भले ही उचाट लगे, पर ज्यों-ज्यों शांति का बोध और लक्ष्य प्रगाढ़ होता जाएगा, आप अपने अस्तित्व से रूबरू होते जाएँगे। पूज्य प्रवर ने कहा कि जो लोग क्रोध के वातावरण में भी शांत रहते हैं वे हीरे की तरह होते हैं, पर जो विपरीत वातावरण आते ही उग्र हो जाते हैं वे काँच के टुकड़े जितनी औकात के बन जाते हैं। संतश्री ने कहा कि क्रोध हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है जो 1 मिनट के लिए आता है और जिंदगीभर मेहनत कर बनाए गए करियर को चौपट कर जाता है।

बच्चों को प्रेम से समझाएँ, गुस्से से नहीं — बनें संयम के साधक

राष्ट्र संत ने कहा कि भगवान महावीर के पाँव के अंगूठे पर डसने वाला चंडकौशिक साँप पिछले जन्म में तपस्वी संत था, पर अपने शिष्य पर गुस्सा करने के कारण वह भयंकर विषधर बन गया। जब वही साँप भगवान के उपदेश को सुनकर शांत हो गया तो देव बन गया। फैसला हमारे हाथ में है कि हम अगले जन्म में सांप बनना चाहते हैं या फिर स्वर्ग के अधिपति। क्रोध पर नियंत्रण करने के लिए हम बच्चों को डाँटें मगर प्यार से। प्यार से समझाएँगे तो बच्चे सुधर जाएँगे और केवल गुस्सा करते रहेंगे तो वे जिद्दी हो जाएँगे। बुरी बात को नेगलेट करने की आदत डालें, सप्ताह में 1 दिन गुस्से का उपवास करें और कोई हम पर क्रोध करे तो मुस्कान से पेश आने की आदत डालें।

अवसर पर डॉ मुनि शांति प्रियसागरजी ने श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र और प्रभु प्रार्थना का सामूहिक उच्चारण कराते हुए कहा कि जो औरों को देता है वही देवता कहलाता है। जो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम आता है, उनकी सेवा करता है, भगवान उसकी झोली सदा भरता है। उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना में धन-दौलत नहीं, वरन औरों के काम आने की सेवा मांगनी चाहिए, क्योंकि सेवा से मेवा अपने आप बरसने लग जाते हैं। जिसके भीतर औरों का भला करने की भावना है उससे अगर सौ गलतियाँ भी हो जाएँ, तो भगवान उसे माफ कर देता है।

डबीरपुरा जैन स्थानक पर राष्ट्र संतों का भव्य स्वागत और अभिनंदन

अन्नदान करने की प्रेरणा देते हुए म.सा. ने कहा कि जो अन्नदान करता है उसका अन्न भंडार सदा भरा रहता है। व्यक्ति आतिथ्य सत्कार के लिए सदा तैयार रहे। महिलाएं चार मुठ्ठी आटा ज्यादा भिगोएँ। चार रोटियों से आपको तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, पर जिसके पेट में अन्न जाएगा उसका बहुत भला हो जाएगा। घर में अनुपयोगी अथवा पुराने कपड़ों को देने में संकोच न खाएं। कोई गरीब बीमार हो जाए तो उसे औषधि दिलाने का पुण्य कमाएं। घर के बाहर मटकी भर के रख दें, छत पर कुंडी भर के रख दें ताकि औरों की प्यास बुझाने का सौभाग्य मिल सके।

इससे पूर्व डबीरपुरा जैन स्थानक फ्लाईओवर के पास राष्ट्र संत श्री ललित प्रभजी, राष्ट्र संत श्री चंद्रप्रभजी, डॉ. मुनि शांति प्रियसागरजी का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रेमचंद, सुरेशचंद, प्रकाशचंद, विनोद कुमार, दिलीप कुमार, संतोष, किशोर, राजेश, सुशील, रोहित, वर्धमान, सुमीत, राहुल, अंकित, आकाश, अमित एवं समस्त कटारिया परिवार का लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति द्वारा अभिनंदन किया गया।

चातुर्मास समिति ने शहरभर में 50 वाटर कूलर समर्पित किए

कार्यक्रम में संरक्षक विमल नाहर, प्रधान संयोजक नवरतन मल गुंदेचा, महामंत्री अशोक नाहर, कोषाध्यक्ष मानक चंद्र पोखरणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमल चंद मुथा विशेष रूप से उपस्थित थे। राष्ट्र संतों का ऐतिहासिक विदाई समारोह एग्जिबिशन ग्राउंड में रविवार 9 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। अवसर पर याद रखेगा हैदराबाद विषय पर राष्ट्र संत उद्बोधन देंगे। इस दौरान संपूर्ण हैदराबाद के श्रद्धालु भाई बहनों द्वारा आभार, अभिनंदन, विदाई समारोह 9 नवंबर को सुबह 9.15 बजे से एग्जीबिशन ग्राउंड नामपल्ली में आयोजित होगा।

लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद के चेयरमैन मोतीलाल भलगट और अध्यक्ष प्रदीप सुराणा ने बताया कि राष्ट्र संतों ने हैदराबाद की धरती को अपने पावन सानिध्य से सिंचित और पवित्र किया। लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति द्वारा आयोजित चातुर्मास में एग्जीबिशन ग्राउंड जीने की कला सिखाने वाला ज्ञानतीर्थ बन गया। 18 हजार से अधिक सामूहिक एकासन व्रत और अनेक दिव्य महोत्सव हुए। एग्जीबिशन ग्राउंड में ही गुरुजनों का मंगल प्रवेश हुआ और वहीं से मंगल विदाई होगी। चातुर्मास के उपलक्ष्य में नवकार गोल्ड, हब्सीगुड़ा वालों द्वारा ठण्डे पानी की 50 मशीन/वाटर कूलर शहर की अलग-अलग सेवा संस्थाओं को समर्पित होंगे। समारोह के पश्चात भोजन प्रसादी का आयोजन होगा। सभी से प्रवचन का लाभ लेने का आग्रह किया गया है।

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