नटखट गौरैया (बाल कविता)

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ओ नटखट गौरैया मुझसे,
दूर-दूर क्यों रहती हो।
चीं-चीं-चीं-चीं करके मुझसे,
न जाने क्या कहती हो।

आकर मेरे पास मटर के,
मीठे दाने खा जाओ।
फुदक-फुदककर ओ गौरैया,
नाच मुझे दिखला जाओ ।

तेरे पंख सुनहले कितने,
कोमल-कोमल प्यारे हैं ।
मुझे बहुत अच्छे लगते
आंखों में बसे हमारे हैं ।

रोज हमारे घर गौरैया,
उड़ कर तुम आया करना।
दाने खाकर पानी पीना,
आंखें मटकाया करना।

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-श्याम सुन्दर श्रीवास्तव कोमल

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