गुब्बारा ठंडी हवा से फूलेगा या गर्म हवा से ? (फन विद फिजिक्स)

बच्चें! क्या आपको मालूम है कि गर्म हवा फैलती है व जगह को भरती है जबकि ठंडी हवा सिकुड़ती है व कम जगह लेती है। इसका अर्थ यह हुआ कि तापमान गैस मॉलिक्यूल्स को प्रभावित करता है। हवा के इस फैलने व सिकुड़ने को गुब्बारे के ज़रिये समझने का एक शानदार तरीका है, जो आज मैं आपको बताने जा रही हूं। इस प्रयोग के लिए हमें पानी, दो कटोरियां, प्लास्टिक की एक खाली बोतल, ब़र्फ के टुकड़े, चम्मच और गुब्बारे की ज़रूरत होगी।

इनके अतिरिक्त अगर आप चाहें तो नीला व लाल फ़ूड कलर भी ले सकते हैं। अब एक कटोरी में गर्म पानी भर लो और दूसरी में ठंडा पानी व उसे चिल करने के लिए उसमें ब़र्फ के टुकड़े भी डाल दें। अगर आप चाहें तो गर्म पानी में लाल फ़ूड कलर व ठंडे पानी में नीला फ़ूड कलर मिला दें, ताकि दोनों तापमानों को ध्यान में रखा जा सके। गुब्बारे को अच्छी तरह से कई बार खींच लें ताकि बाद में उसके अंदर हवा आसानी से जा सके।

गुब्बारे को बोतल के मुंह पर चढ़ा दें और उसके शेष भाग को बोतल पर लटका रहने दें। इस सेटिंग के बाद हमें प्रयोग आरंभ करना है। बोतल को गर्म पानी में डुबो दें और गुब्बारे को फूलता हुआ देखें। कुछ मिनट बाद इस बोतल को ठंडे पानी में ट्रांसफर कर दें और गुब्बारे में से धीमे-धीमे हवा निकलते हुए देखें यानी वह पहले जैसा हो जायेगा। ऐसा क्यों हुआ?

जब प्लास्टिक की बोतल गर्म पानी में थी तो बोतल के अंदर के हवा के मॉलिक्यूल्स (अणुओं) ने हीट एनर्जी जज्ब कर ली। जैसे ही मॉलिक्यूल्स को ऊर्जा मिली वह तेज़ी से चलने लगे, एक-दूसरे से दूर फैलने लगे और अधिक जगह घेरने लगे। इससे हवा फैलने लगी, गुब्बारे के अंदर जाने लगी और गुब्बारा फूलने लगा। इसे थर्मल एक्सपेंशन (तापीय प्रसार) कहते हैं। जब तापमान बढ़ता है तो गुब्बारे में हवा का वॉल्यूम (आयतन) भी बढ़ जाता है।

जब बोतल को ठंडे पानी में रखा जाता है तो हवा के मॉलिक्यूल्स में से ऊर्जा निकलने लगती है। उनकी गति कम हो जाती है और वह एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। इससे बोतल के अंदर हवा कम जगह लेती है। इस थर्मल कॉन्ट्रैक्शन (तापीय संकुचन) के कारण गुब्बारे से हवा निकलकर बोतल में वापस पहुंच जाती है और गुब्बारा सिकुड़ जाता है। जब तापमान कम होता है तो गुब्बारे के अंदर हवा का वॉल्यूम भी कम हो जाता है।

आपने हॉट एयर बैलून देखे होंगे। वह भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। जब बर्नर बैलून के अंदर की हवा को गर्म कर देता है तो हवा के मॉलिक्यूल्स तेज़ी से चलते हुए फैल जाते हैं, हवा बाहर की ठंडी हवा की तुलना में कम घनी हो जाती है। चूंकि गर्म हवा ठंडी हवा से हल्की होती है इसलिए बाहर की ठंडी, भारी हवा बैलून को ऊपर उठा देती है।

यह नियंत्रित करने के लिए कि बैलून कितना ऊपर को जाता है, पायलट बर्नर से बैलून के अंदर की हवा को अधिक गर्म कर देता है। जब पायलट नीचे आना चाहता है तो वह बर्नर की लौ कम करके बैलून के अंदर की हवा को ठंडा होने देता है, जिससे वह घनी हो जाती है और बैलून नीचे की ओर आ जाता है। हवा को गर्म व ठंडी करने की प्रक्रिया के कारण पायलट बैलून की ऊंचाई को नियंत्रित करता है।

-निकहत कुंवर

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