nature poem
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नटखट
नटखट गौरैया (बाल कविता)
ओ नटखट गौरैया मुझसे,दूर-दूर क्यों रहती हो।चीं-चीं-चीं-चीं करके मुझसे,न जाने क्या कहती हो। आकर मेरे पास मटर के,मीठे दाने खा…
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नटखट
एक पेड़ मां के नाम (बाल कविता)
हरी-भरी है धरती हमारीपेड़ों की महिमा न्यारी ।देते यह शुद्ध हवा-पानीमां,पेड़ होते हैं बड़े दानी ।। मां जैसे इनके भी…
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