साध्वी गवेषणाश्री के सान्निध्य में नवाह्निक आध्यात्मिक महाअनुष्ठान जारी

हैदराबाद, साध्वी डॉ. गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, डी.वी. कॉलोनी में आध्यात्मिक अनुष्ठान जारी है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. साध्वी गवेषणाश्री ने कहा कि नवरात्र शक्ति जागरण का समय है। नवरात्र में विशेष अनुष्ठान किया जाता है। जैसे बाहर का सौरमंडल है, वैसे ही भीतर में सौरमंडल है। जहाँ सूर्य है, चन्द्रमा है, बुध है, बृहस्पति है, शनि है, मंगल है। बाहर का सौरमंडल भीतर के सौरमंडल को प्रभावित कर अपना परिणाम दिखाता है।

जब तक बाहर का सौरमंडल भीतर के सौरमंडल को प्रभावित नहीं करता, तब तक उस सौरमंडल का प्रभाव हमें प्रभावित नहीं करता। बाहरी सौरमंडल कमजोर हो सकता है, किन्तु यदि व्यक्ति ने तेजस केंद्र पर ध्यान की अच्छी साधना की है, तो सूर्य ग्रह शाक्तशाली बन जाएगा। फिर सूर्यग्रह जो जन्म-कुण्डली का है, वह प्रभावित नहीं करेगा। साध्वी मेरूप्रभाजी ने कहा कि अनुष्ठान का यह समय सब दृष्टियों से पवित्र है। इस पवित्र समय में भावविशुद्धि का अनुष्ठान कर मन, वचन, काया को हल्का करें।

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साध्वी मयंकप्रभाजी ने कहा कि सिद्धि के लिए साधन का प्रयोग आवश्यक है और प्रयोग की सफलता के लिए एकाग्रता का विकास। चंचलता को कम करना है तो साधना निश्चित ही करनी होगी। साध्वी दक्षप्रभाजी ने अनुष्ठान की महिमा बताते हुए भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। हुबली से समागत मीत बागरेचा ने कविता प्रस्तुत की। बाल कवि लवीश संकलेचा ने कविताओं के माध्यम से आज के युग की चुनौती प्रस्तुत की। महासभा सदस्य लक्ष्मीपत बैद ने विचार रखे। सभाध्यक्ष सुशील संचेती व किशोर मंडल के साथियों ने बाल कलाकार का स्वागत किया।

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