श्रीदेवी वेद विद्यालय की नई समिति का गठन

हैदराबाद, प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन श्रीशैलम क्षेत्र में स्थित 50 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था श्रीदेवी वेद विद्यालय के प्रबंधन की नई समिति का गठन किया गया है। यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अयोध्या के श्रीराम मंदिर के कोषाध्यक्ष एवं महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष परम पूज्य गुरुजी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज के मार्गदर्शन में भारतवर्ष में चल रहे वेदों के प्रचार-प्रसार कार्य के अंतर्गत इस विद्यालय की नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया है।

यह कदम वेदों की पवित्र परंपरा को मजबूत करने और युवा पीढ़ी में वैदिक ज्ञान का प्रसार करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। 1984 में स्थापित श्रीदेवी वेद विद्यालय दशकों से ऋग्वेद, कृष्ण यजुर्वेद और अथर्ववेद की शिक्षा प्रदान कर रहा है, अब नई समिति के नेतृत्व में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। गुरुजी श्री गोविंद देव गिरि जी महाराज, जो स्वयं वैदिक परंपराओं के प्रखर संरक्षक हैं, ने इस गठन को वेदों के संरक्षण और प्रसार के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उनके नेतृत्व में अयोध्या से प्रेरित यह पहल पूरे देश में वैदिक शिक्षा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

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वैदिक शिक्षा और धार्मिक कार्यक्रमों का नवाचार

नई समिति के अध्यक्ष रवि प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार भगड़िया, उपाध्यक्ष टी. मलिकार्जुन राव, आयोजक सचिव महेश नंदे गुरुजी. के.के. शर्मा, मैनेजिंग ट्रस्टी जगदीश सोंथालिया, श्रीनिवास बाबू (सी.ए.), संजय लाहोटी, संपत तोष्णीवाल, के. बालासुब्रमण्यम (कॉमर्स), एन. विजय कुमार, मल्हारी रामचंद्र मूर्ति, विपिन राम अग्रवाल एवं जगदीश्वर मुनिगेला (रिटायर्ड आईएएस) शामिल हैं। यह समिति विद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों का संचालन करेगी।

नए अध्यक्ष रवि प्रसाद ने बताया कि नई समिति का मुख्य उद्देश्य विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए वैदिक शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाना है। साथ ही, गौशाला संरक्षण और ललिता सहस्रनाम स्तोत्र जैसे धार्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। समिति के सदस्यों ने गुरुजी श्री गोविंद देव गिरि जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा वेदों के संरक्षण के संकल्प को दोहराया। श्रीशैलम के इस पवित्र क्षेत्र में वैदिक शिक्षा का यह नया अध्याय न केवल स्थानीय समुदाय के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए वैदिक धरोहर को मजबूत करने वाला सिद्ध होगा।

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