नोबेल पुरस्कार विजेता ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी की जेल में बिगड़ी तबीयत
बेरूत: जेल में बंद ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वकील नरगिस मोहम्मदी की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें ‘‘स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम’’ है, लेकिन ईरान सरकार उन्हें उपचार के लिए तेहरान भेजने को राजी नहीं है। मोहम्मदी के परिवार ने यह दावा किया।
मोहम्मदी के परिवार ने बताया कि वह मोहम्मदी का इलाज उनके निजी चिकित्सक से कराना चाहता है जो तेहरान में है लेकिन ईरान के खुफिया मंत्रालय ने उन्हें वहां स्थानांतरित करने का विरोध किया है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मदी (करीब 50 वर्ष) को शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने और बेहोश होने के बाद ईरान के उत्तर-पश्चिम में जंजान के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके परिवार ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तारी के दौरान हुई पिटाई के बाद से उनकी सेहत बिगड़ती जा रही थी।
उनकी संस्था ने बताया कि जंजान में चिकित्सकों ने किसी भी तरह का इलाज करने से पहले उनके रिकॉर्ड मांगे हैं और उन्हें तेहरान स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। पेरिस में रह रहे उनके पति ताघी रहमानी ने कहा कि खुफिया मंत्रालय मोहम्मदी को ‘एंजियोग्राफी’ के लिए तेहरान नहीं भेज रहा। उन्होंने यह बात एक ‘वॉइस मैसेज’ में कही, जिसे संस्था ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) के साथ साझा किया था।
नॉर्वे की नोबेल समिति ने एक बयान में ईरानी अधिकारियों से कहा कि मोहम्मदी का जीवन अब उनके हाथों में है और उसने उनसे मोहम्मदी को तुरंत उनकी चिकित्सा टीम के पास भेजने का आग्रह किया। उनके पति ने ‘स्काई न्यूज’ से कहा, ‘‘उनमें जेल की सजा काटने की मानसिक क्षमता तो है, लेकिन उनका शरीर इसके लिए तैयार नहीं है। खुफिया मंत्रालय को उनकी मौत से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि मोहम्मदी के बच्चों ने उन्हें एक दशक से भी अधिक समय से यानी 2015 से नहीं देखा है। एपी
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