रामजी से नाता रखने वाले ही रहते हैं सुखी : जयाकिशोरीजी

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हैदराबाद, व्यक्ति को यदि जीवन में सुखी रहना है, तो संसारी नहीं, बल्कि प्रभु श्रीरामजी से नाता रखो। संसारी कभी भी उम्मीद पर खरे नहीं उतरते, जबकि केवल प्रभु ही हैं, जो भक्त की उम्मीद पर खरे उतरते हैं। वह दुःख-सुख में सहयोगी बनते हैं।

उक्त उद्गार शमशाबाद स्थित एस.एस. कन्वेंशन में प्रभुदयाल पंच परिवार, टिब्बा बसई वाले द्वारा आयोजित श्री राम कथा के तृतीय दिवस कथा की महत्ता बताते हुए आध्यात्मिक प्रवक्ता जयाकिशोरीजी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि दुनिया में धन दौलत सभी को चाहिए भगवान दे देते हैं। धन-दौलत, पद-प्रतिष्ठा मिलना कठिन नहीं है, पर इसे संभालना कठिन है, क्योंकि संभालने में मेहतन लगती है। पद-प्रतिष्ठा के साथ अहंकार भी आता है। लोगों की आशाएँ पूर्ण न होने व ज्यादा उम्मीद से बहुत दुःख होता है। हर कोई कार्य को लेकर अगले से अच्छी उम्मीद रखता है।

संत कहते हैं कि जीवन में किसी से कार्य के बदले उम्मीद नहीं रखनी है। जीवन में यदि श्रीराम से नाता रखेंगे, तो फिर जीवन में सुखी रहेंगे। उन्होंने कहा कि संसारी व्यक्ति एक बार गद्दी पर बैठ जाता है, तो फिर वह उसी पर बैठे रहना चाहता है, जबकि एक उम्र के बाद संतान को गद्दी पर बैठाकर जिम्मेदारियाँ सौंप दें। बच्चे समझदार हैं, तो उन पर जीवन छोड़ देना चाहिए। फैसले खुद लेने दें। जीवन में यदि गलती भी करेंगे तो पीछे रहें।

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श्रीराम कथा: वन गमन से राज्याभिषेक तक भक्तों के लिए प्रेरक

गलतियाँ करेंगे तभी संभलना आयेगा। गलतियाँ तो सभी से हुई हैं। पहली उम्मीद रखना गलती नहीं करेगा यह बात ही गलत है। उन्होंने कहा कि राजा दशरथ ने रामजी को राज्य सौंपने का निर्णय इसलिए लिया, क्योंकि उनके पुत्र राम हैं, जो मर्यादा में रहना जानते हैं।

कई बार माता-पिता बच्चों की हरकत देखकर जिम्मेदारी सौंपने से पीछे हटते हैं। बच्चो को जीवन में कुछ चाहिए, तो उसी प्रकार का सम्मान देना होगा। जिम्मेदारी चाहिए तो जिम्मेदार बनकर दिखाना होगा। जयाकिशोरजी ने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान उनसे ज्यादा खुश और उन्नति करे, इससे बड़ा और कोई रिश्ता नहीं है। इतना प्रेम कोई नहीं करता, जितना माता-पिता करते हैं। संकट के समय पूरी रात जागते हैं।

हम यदि किसी की मदद करते हैं, तो बदले में मदद चाहते हैं, वापसी की उम्मीद रहती है। हर रिश्ते में वापसी की उम्मीद रखते हैं। जयाकिशोरीजी ने श्री राम वन गमन, शबरी प्रसंग, केवट प्रसंग, हनुमानजी से मिलन, सीता हरण, रावण वध और अयोध्या आगमन के बाद राम राज्याभिषेक के प्रसंग से भक्तों को भाव विभोर किया। तीन दिन से चली आ रही श्रीरामजी की कथा को विराम दिया गया। अवसर पर सहयोगियों व अतिथियों का सम्मान किया गया।

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