पाक के परमाणु परीक्षणों से शांति को खतरा!

राष्ट्रपति ट्रंप के खुलासे के बाद पाकिस्तान की सिट्टी-पिट्टी गुम है। खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना की तरफ से भी अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ज्यादातर मंत्रियों और फौजी अफसरों तक को ऐसी कोई जानकारी नहीं है। पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का खंडन नहीं कर सकता, क्योंकि आका नाराज हो जाएंगे और उधारी का रास्ता बंद हो जाएगा। यदि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि करता है, तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण (आईएईए) सख्त कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में अब पाकिस्तान आखिर करे तो क्या करे?

पड़ोसी देश पाकिस्तान ने तीसरी बार परमाणु परीक्षण किया है अथवा परीक्षण की तैयारी की जा रही है या फिर उनकी ऐसी कोई रणनीति है! अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसा खुलासा कर दुनिया में सनसनी फैला दी है। उन्होंने कहा है कि रूस, चीन, उत्तरी कोरिया और पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। सिर्फ अमेरिका ने ऐसा नहीं किया है। अमेरिका ने 1992 में अंतिम परमाणु परीक्षण किया था, जब 1990 में रूस ने परीक्षण कर विश्व को चौंका दिया था। उस समय विश्व में हड़कंप मच गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने अब यह भी कहा है कि अमेरिका हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकता, लिहाजा बहुत संभावनाएं हैं कि तीन लंबे दशकों के बाद अमेरिका फिर परमाणु परीक्षण करे!

वैसे ट्रंप के बयान भरोसे लायक तो नहीं होते हैं, क्योंकि वह अनर्गल अलाप के आदी हैं, लेकिन परमाणु परीक्षण के संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति व्यर्थ बयान नहीं दे सकते, ऐसा हमारा मानना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान को रूस, चीन, उत्तरी कोरिया की जमात में रख कर ये खुलासा किया है। ये सभी देश परमाणु परीक्षण करने में जुटे हैं। मसलन-रूस ने खाबरोवस्क परमाणु पनडुब्बी लाँच की है, जो परमाणु रिएक्टर से चलेगी। यह पानी में 500 मीटर भीतर तक कारगर है और बहुत विनाशकारी हथियार है।

रूस ने हाल ही में 14,000 किमी तक प्रहार करने वाली मिसाइल का भी परीक्षण किया है, जिसे लेकर अमेरिका समेत शेष विश्व भयभीत हैं। उसके वारहेड भी परमाणुमय हैं। चीन का बयान भी सामने आया है कि वह पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा। हमारे हथियार आत्मरक्षा के लिए हैं। बहरहाल राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी पर्दाफाश किया है कि ऐसे परीक्षण जमीन के गहरे भीतर किए जाते हैं। उनसे जो कंपन होता है, उसे भूकंप करार दिया जाता है।

आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव

चूंकि बीते रविवार को अफगानिस्तान में भी कथित भूकंप के, 6.3 की तीव्रता के, झटके महसूस किए गए, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई। ऐसे झटके भारत के किसी भी हिस्से में महसूस नहीं किए गए, जबकि पाकिस्तान उससे सटा हुआ पड़ोसी देश है। बल्कि पाकिस्तान भारत का सहोदर देश है। यह एक गंभीर सवाल हो सकता है। सवाल यह भी मौजू है कि जिस देश पर 103.38 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपए का कर्ज है, जिस देश की जीडीपी के 70 फीसदी हिस्से के बराबर कर्ज है, जिसके प्रत्येक नागरिक पर 1230.5 डॉलर की उधारी है और 40 फीसदी से अधिक आबादी गरीबी-रेखा के नीचे है, क्या ऐसा देश परमाणु परीक्षण की सोच सकता है? अथवा परीक्षण कर सकता है?

राष्ट्रपति ट्रंप के खुलासे के बाद पाकिस्तान की सिट्टी-पिट्टी गुम है। खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना की तरफ से भी अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ज्यादातर मंत्रियों और फौजी अफसरों तक को ऐसी कोई जानकारी नहीं है। पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का खंडन नहीं कर सकता, क्योंकि आका नाराज हो जाएंगे और उधारी का रास्ता बंद हो जाएगा। यदि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि करता है, तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण (आईएईए) सख्त कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में अब पाकिस्तान आखिर करे तो क्या करे?

पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर सवाल

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर ढक्कन लगा कर आईएईए उसके परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में ले सकता है। पाकिस्तान पर अमेरिका भी आर्थिक पाबंदियां थोप सकता है। सवाल यह भी है कि क्या परमाणु परीक्षण चोरी-छिपे किए जा सकते हैं? भारत ने मई, 1998 में पोखरण में एक साथ पांच परमाणु परीक्षण किए थे। बदले में पाकिस्तान ने भी 29-30 मई, 1998 को चागई-1 और 2 के तहत कुल पांच परीक्षण किए।

उनके बाद कोई परमाणु परीक्षण नहीं किए गए, लेकिन पाकिस्तान में परमाणु हथियारों की सुरक्षा के मद्देनजर आशंकाएं उठाई जाती रही हैं कि परमाणु अस्त्र आतंकियों के हाथों में जा सकते हैं अथवा पाकिस्तान सऊदी अरब सरीखे मुस्लिम देशों को परमाणु हथियार किराये पर भी दे सकता है। क्या ऐसा संभव है?

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले कर उन्हें तबाह कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के सारे हमलों को नष्ट कर दिया था।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी रुख में बदलाव

इस दौरान पाकिस्तान में बैठे बड़े-बड़े नेताओं द्वारा बार-बार परमाणु हमले की गीदड़भभकी दी जा रही थी। लेकिन अब पाकिस्तान की हेकड़ी निकल गई है और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने खुद सच्चाई कबूल ली है। हाल ही में शहबाज शरीफ ने भारत के साथ संभावित परमाणु संघर्ष की आशंकाओं को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद में छात्रों को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांति बनाए रखने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और राष्ट्रीय रक्षा के लिए है न कि आक्रामकता के लिए। शहबाज शरीफ का यह बयान भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने तीखी सैन्य प्रतिक्रिया देते हुए 9 आतंकी ठिकानों पर हमले किए, जिनमें बहावलपुर भी शामिल था जिसे जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी संगठन का गढ़ माना जाता है। बता दें, पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया था। उस वक्त पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा था कि देश अलर्ट पर है, लेकिन वह अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ विकट परिस्थितियों में ही करेगा। उन्होंने कहा था, हमारे अस्तित्व को सीधा खतरा हो, तभी हम इस पर विचार करेंगे।

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परमाणु खतरे पर भारत की चेतावनी और तैयारी

परमाणु मुद्दे पर बहस तब और बढ़ गई थी जब पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई के पूर्व महानिदेशक जावेद अशरफ काजी ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि दोनों परमाणु संपन्न देश हैं और युद्ध से परमाणु विनाश हो सकता है। द्वितीय विश्व युद्ध से तुलना करते हुए जावेद अशरफ काजी ने कहा था, जापान में सिर्फ दो बम गिराए गए थे और उसके नतीजे आज भी सामने दिखाई देते हैं।

भारत और पाकिस्तान के पास 170-170 से ज्यादा परमाणु बम हैं। इतने बमों के साथ युद्ध की कल्पना करना भी भयावह है।ट हालांकि, पाकिस्तान की ये हमेशा से आदत रही है कि तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तानी राजनीतिक और सैन्य नेता परमाणु धमकी का सहारा लेते हैं। इस पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया था कि पाकिस्तान का न्यूक्लियर ब्लैकमेल अब नहीं चलेगा। पीएम मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान के प्रॉक्सी वॉर को अब जंग माना जाएगा और उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि अगर सीमा पार से कोई भी आतंकी हमला होता है तो उसे देश के खिलाफ जंग ही माना जाएगा।

डॉ.ओ.पी.त्रिपाठी
डॉ.ओ.पी.त्रिपाठी

पाकिस्तान में परमाणु अस्त्रां की ऐसी असुरक्षा के मद्देनजर भारत की संप्रभुता और अखंडता को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। खतरों पर चिंताएं जताई जाती रही हैं। हालांकि सेना ने बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि भारत हरेक खतरे और चुनौती का सामना करने में सक्षम है। यदि परमाणु परीक्षण किया जा रहा है,तो भी भारत की सेनाएं और सरहदें चौकस हैं। हालांकि हम विदेश मंत्रालय के अधिकृत बयान की प्रतीक्षा में हैं। पुष्टि के बाद ही ऐसे बयान संभव हैं। विश्व समुदाय को यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकवादियों के हाथ न लगें।

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