पर्युषण आत्मोन्नति का पर्व : श्री भक्तिदर्शनजी

हैदराबाद, पर्युषण पर्व जैन धर्म के लोगों के लिए महत्वपूर्ण त्यौहार है जो उन्हें आध्यात्मिक विकास और आत्म सुधार के लिए प्रेरित करता है। यह पर्व उन्हें अपने कर्मों का पश्चाताप करने, वर्तमान में अच्छे कर्म करने और भविष्य में अच्छे कर्म करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में श्री भक्तिदर्शन विजयजी म.सा. ने दिये।

पूज्यश्री ने कहा कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का स्वागत भाव से करते हुए आराधना साधना से पुष्ट करें। पर्युषण पर्व जैन धर्म के लोगों के लिए महत्वपूर्ण त्यौहार है जो उन्हें आध्यात्मिक विकास और आत्म सुधार के लिए प्रेरित करता है। यह पर्व उन्हें अपने कर्मों का पश्चाताप करने, वर्तमान में अच्छे कर्म करने और भविष्य में अच्छे कर्म करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। म.सा. ने कहा कि पर्युषण पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना है।

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संवत्सरी पर क्षमा याचना और प्रवचन सभा

इस दौरान जैन धर्मावलंबी उपवास, ध्यान और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, जिससे वे अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकें। यह क्षमा का भी पर्व है। म.सा. ने कहा कि पर्युषण पर्व का अंतिम दिन संवत्सरी कहलाता है। इस दिन जैन धर्मावलंबी मिच्छामी दुक्कड़म कहकर एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं।

प्रचार संयोजक जसराज देवड़ा धोका ने बताया कि आज सुबह लोगस्स तप के बियासने का लाभ खम्मा देवी छगनलाल बालड पादरू वालों ने लिया। प्रवचन में प्रभावना लेखराज बाबूलाल सोलंकी जालौर वालों की तरफ से दी गई। बुधवार 20 अगस्त से पर्युषण पर्व के पहले दिन प्रवचन सभा में वार्षिक अष्ट प्रकारी पूजा के चढ़ावे बोले जाएंगे। संघ अध्यक्ष चंपालाल भंडारी व मंत्री फतेहराज, चातुर्मास संयोजक बाबूलाल सालेचा ने सकल संघ से प्रवचन में पधारने की विनती की है।

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