अश्विन मास में करें अश्विन कुमारों को प्रसन्न

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विक्रम पंचांग का हर मास खास विशेषता लिए होता है। अश्विन मास को शास्त्रां और नक्षत्रों की दृष्टि से अद्वितीय माना गया है। इसका सीधा संबंध उन दिव्य जुड़वां देवताओं से है, जिन्हें अश्विनी कुमार कहा जाता है। अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य, अमृत और औषधि के दाता हैं। अश्विन मास व्रत और त्योहारों के साथ अश्विनी नक्षत्र, दिव्य आशीर्वाद और वेद-पुराणों की गहराई से भी जुड़ा हुआ है।

पुराणों और वेदों में वर्णित अश्विनी कुमार दो जुड़वां देवता हैं, जिन्हें नासत्य और दश्र भी कहा जाता है। इन्हें देवताओं और त्रषियों के वैद्य के रूप में जाना जाता है। किसी भी रोग, चोट या दुर्भाग्य के समय ये तुरंत मदद करते थे और अमृत या औषधि देकर जीवन को पुनर्जीवित करते थे। त्रग्वेद में इनके कई मंत्र मिलते हैं, जिनमें स्वास्थ्य, शक्ति और जीवन रक्षा की प्रार्थना शामिल है।

अश्विन मास : आशीर्वाद और ऊर्जा का समय

इन्हें घोड़ों जैसी तेजस्विता और गति वाला माना गया, इसलिए इनका नाम अश्व से जुड़ा है। विक्रम पंचांग के अनुसार, अश्विन मास भाद्रपद के बाद और कार्तिक के पहले आता है। इस मास की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में स्थित होता है, जिसका अधिष्ठाता देवता अश्विनी कुमार हैं। यही कारण है कि इस मास का नामकरण सीधे उनके नाम पर हुआ। अश्विन मास में कई महत्वपूर्ण त्यौहार आते हैं, जैसे दशहरा और इस समय व्रत, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

पुराणों में जब अश्विनी कुमार किसी को औषधि या वरदान देते थे, तो अस्तु शब्द का प्रयोग होता था। संस्कृत में अस्तु का अर्थ है- ऐसा हो यानी आशीर्वाद और स्वीकृति। देवताओं द्वारा दिया जाने वाला आशीर्वाद इसी से संबंधित है। इससे स्पष्ट होता है कि सिर्फ मास का नाम नहीं, बल्कि अश्विनी कुमार के आशीर्वाद का स्वरूप भी इस मास में प्रभावशाली है, जिस प्रकार अस्तु से किसी की रक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है, वैसे ही इस मास के दौरान किए गए पूजा, व्रत और दान का महत्व बढ़ जाता है।

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अश्विन मास में की गई पूजा और व्रत शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करते हैं। यह मास अश्विनी कुमार के आशीर्वाद और नक्षत्रों की ऊर्जा को ग्रहण करने का समय है। अस्तु का उच्चारण और आशीर्वाद लेने से जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। अश्विनी कुमार का दिव्य स्पर्श और आशीर्वाद लेने का अवसर है अश्विन मास। इस मास में पूजा, व्रत और दान करने से न सिर्फ आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि अस्तु की शक्ति से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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