सांसदों की सर्वदलीय बैठक में रेवंत ने किया संघर्ष का ऐलान

Ad

हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के जल अधिकार सर्वोपरि हैं। सरकार राज्य के हितों के लिए सभी मंचों से अपनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश द्वारा बंकाचर्ला-पोलावरम परियोजना शुरू करने के कदम का विरोध करने के लिए अपनी दृढ़ता जताते हुए दावा किया कि यह परियोजना तेलंगाना के हितों के खिलाफ है। इसलिए चाहे चंद्रबाबू और पीएम मोदी की कितनी ही दोस्ती क्यों न हो, तेलंगाना राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी मंचों से अपनी लड़ाई लड़ेगा।

गोदावरी नदी पर एपी सरकार की बंकाचर्ला परियोजना को लेकर बुधवार को आयोजित सर्वदलीय सांसदों की बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने में सहयोग देने की अपील की, ताकि केंद्र सरकार पर इसे आगे बढ़ाने के खिलाफ दबाव बनाया बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के जलहित के लिए सभी को एकमत होना होगा।

सरकार इस दिशा में राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करेगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले महीने संसद के आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। तेलंगाना कृष्णा से 500 और गोदावरी से 1000 टीएमसी जल के अपने अधिकार को पाने के लिए लड़ाई जारी रखेगा। रेवंत रेड्डी ने कहा कि वे गुरुवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मिलेंगे।

परियोजना का विरोध करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री सहित सभी संबंधित मंत्रियों से भेंट की जाएगी। रेवंत ने कहा कि परियोजना के लिए अभी भी पर्यावरण और अन्य मंजूरी की अगर जरूरत पड़ती है, तो केंद्र पर दबाव बनाने के लिए तीन या चार दिन नई दिल्ली में रहूंगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई के बाद कानूनी लड़ाई होगी। सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ वकीलों को नियुक्ति करने के लिए तैयार है।

तेलंगाना हितों पर अडिग सीएम की केंद्र से दो टूक

सीएम ने स्पष्ट किया कि सर्वदलीय बैठक राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं थी, बल्कि बंकाचर्ला परियोजना से राज्य के हितों की किस तरह रक्षा के लिए सभी को एक करने के लिए थी। उन्होंने विपक्ष के सभी तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार इस मामले में किसी प्रकार की उपेक्षा नहीं कर रही है। उन्होंने इस मामले को लेकर केसीआर, बाबू और किशन रेड्डी को घेरने का प्रयास किया।

बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एपी अपने लिए चाहे जिस तरह की परियोजना बनाए, लेकिन तेलंगाना के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र से प्रखर रूप से माँग की जाएगी कि कृष्णा और गोदावरी बेसिन पर तेलंगाना की परियोजनाओं को एनओसी दी जाए। शेष पानी का इस्तेमाल किसी भी तरह से किया जा सकता है।

सीएम ने कहा कि गुरुवार को केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से मिलकर वे अपनी अपनी आपत्ति दर्ज करेंगे। सीएम ने कहा, हम बंकाचर्ला के मुद्दे पर संसद की बैठकों में प्रधानमंत्री समेत सभी से भेंट करेंगे और तेलंगाना की समस्याओं को उनके सामने रखेंगे। यदि राजनीतिक लड़ाई में न्याय नहीं मिलता है, तो कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ी जाएगी। सीएम ने बार-बार केंद्रीय नेताओं से मिलने के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि क्या हमें सिंचाई परियोजनाओं, मेट्रो विस्तार, क्षेत्रीय रिंग रोड और मूसी सफाई की अनुमति के लिए केंद्र सरकार से नहीं मिलना चाहिए? यदि केसीआर फंड देते हैं, तो वे फार्महाउस जाने के लिए भी तैयार हैं।

केसीआर ने तेलंगाना के साथ किया विश्वास घात

संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव का तत्कालीन वीडियो जारी करते हुए उन पर तेलंगाना द्रोही जैसे गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने गोदावरी जल प्रबंधन समिति के समक्ष दर्ज केसीआर के बयान का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किया। साथ ही कहा कि केसीआर ने रायलसीमा का बड़ा भाई बनने के प्रयास में तेलंगाना के साथ विश्वासघात किया है।

सीएम ने कहा कि बंकाचर्ला परियोजना की नींव 2019 में रखी गई थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी को आश्वासन दिया था कि वह गोदावरी के पानी को कृष्णा और पेन्ना बेसिन में मोड़कर रायलसीमा को उपजाऊ बनाने के पड़ोसी राज्य के प्रयासों में अपना सहयोग देंगे। राव और जगन इस दिशा में 400 टीएमसी फीट गोदावरी जल को रायलसीमा क्षेत्र में मोड़ने पर सहमत हो गये थे।

यह भी पढ़ें… राज्यपाल ने किया भारत सेवाश्रम संघ के वार्षिक नोटबुक वितरण अभियान का शुभारंभ

तेलंगाना की अनदेखी और केसीआर की चुप्पी

तत्कालीन सिंचाई मंत्री हरीश राव और तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर ने दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में आयोजित शीर्ष परिषद की बैठक में भाग लिया, लेकिन तेलंगाना के हितों पर खामोश रहे। गोदावरी के तीन हज़ार टीएमसी जल के समंदर में बेकार जाने की बात करके उन्होंने रायलसीमा को जल उपलब्ध कराने का समर्थन किया था, लेकिन आज वे दुर्भावनापूर्ण इरादे से राजनीतिक लाभ के लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

सीएम ने तत्कालीन मंत्रियों ईटेला राजेंद्र और बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी की बैठक की भी याद दिलायी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस नेता राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैला रहे हैं। केसीआर के ग़लत फैसलों को ही अब आंध्र प्रदेश बहाना बनाकर आगे बढ़ रहा है। केसीआर और चंद्रबाबू ने 2016 में गोदावरी-बंकाचर्ला को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान यदि तेलंगाना की परियोजनाओं को पूरा किया जाता, तो आज यह मुद्दा ही नहीं होता। लेकिन ऐसा न करके ऐसी परियोजनाओं पर काम किया गया, जिससे उनका निजी लाभ हो सकता है।

किशन रेड्डी की परिधि का नहीं है परियोजना का मुद्दा

रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किशन रेड्डी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जब उन्होंने सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया तो किशन रेड्डी समय न होने के बहाना करके नहीं आये, जबकि इसी मुद्दे पर उन्हें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर से मिलने का समय मिल गया। उन्होंने कहा कि बंकाचर्ला परियोजना का मुद्दा किशन रेड्डी की परिधि का नहीं है। चूँकि मोदी सरकार को बाबू की ज़रूरत है, इसलिए बाबू मोदी को मनाने का भरपूर प्रयास करेंगे।

उत्तम ने बताये परियोजना के तथ्य

सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ गुरुवार, 19 जून को एक बार फिर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से नई दिल्ली में मिलेंगे और पोलावरम-बंकाचर्ला लिंक परियोजना (पीबीएलपी) के निर्माण की आंध्र प्रदेश सरकार की योजनाओं पर तेलंगाना सरकार की कड़ी आपत्ति से उन्हें अवगत करायेंगे।

उत्तम ने सर्वदलीय बैठक में परियोजना में एपी के प्रस्ताव और तेलंगाना को होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भाजपा के सांसद डीके अरुणा, रघुनंदन राव, बीआरएस के राज्यसभा सासंद वड्डी रवि चंद्रा, मजलिस के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के अनिल कुमार यादव, मल्लु रवि, रेणुका चौधरी एवं अन्य सांसदों ने भाग लिया। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने गोदावरी बेसिन, गोदावरी नदी पर विभिन्न राज्यों द्वारा निर्मित परियोजनाओं और पीबीएलपी पर अपनी पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को एपी सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई बातों पर एक विस्तृत जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण के 1980 के फैसले के अनुसार, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित सभी सह-बेसिन राज्यों को नदी के पानी पर अधिकार है और एपी एकतरफा दावा नहीं कर सकता।

केंद्र में प्रभाव के कारण भ्रम में न रहें बाबू

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अपने पुराने मित्र व एपी के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायुडू को चेतावनी देने से भी नहीं चूके। उन्होंने चंद्रबाबू नायुडू को सचेत करते हुए कहा, अगर आपको लगता है कि केंद्र में प्रभाव के कारण परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, तो आप भ्रम में हैं। तेलंगाना राज्य के हितों की रक्षा के लिए हमारे पास भी अपनी योजना है। रेवंत ने सीधे बाबू को संबोधित करते हुए कहा कि केसीआर के दावे के अनुसार यदि वे मानते हैं कि गोदावरी बेसिन में 3 हजार टीएमसी अधिशेष पानी है, तो तेलंगाना के पास 968 टीएमसी का उपयोग करने का पूरा अधिकार है।

तेलंगाना का पानी देने के बाद अधिशेष पानी ले सकते हैं। सीएम ने कहा कि मोदी को चंद्रबाबू की जरूरत है, जैसे भगवान को अपने भक्त से जुड़ने की जरूरत है। चंद्रबाबू को गोदावरी के पानी की जरूरत है। इसलिए बाबू भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बाबू को तेलंगाना के हितों के बारे में सोचना होगा। उन्हें यह समझना होगा कि दूरी बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। केवल मोदी से अनुमति लेने से उनकी परियोजनाएं पूरी नहीं होंगी। तेलंगाना भी इसका पक्ष है और जहाँ से पानी जा रहा है, पहले उसका अधिकार होता है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Ad

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button