दक्षिणी राज्यों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दें पीएम मोदी : गहलोत

जयपुर, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह दक्षिणी राज्यों द्वारा उठाई गई परिसीमन की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दें, अन्यथा यह मुद्दा संवेदनशील रूप ले सकता है।

गहलोत ने जयपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि दक्षिणी राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं बढ़ती बेचैनी को दर्शाती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के नेताओं द्वारा व्यक्त किए गए गुस्से और आशंकाओं को प्रधानमंत्री को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। मैं यह जानबूझकर दोहरा रहा हूं कि यदि दक्षिण के लोग यह महसूस करने लगें कि उत्तर के लोग उनकी स्थिति कमजोर कर रहे हैं, तो हालात बिगड़ सकते हैं।” तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि यह मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

गहलोत ने कहा, “उन्होंने 1950 और 60 के दशक के आंदोलनों जैसी स्थिति का संकेत दिया है। यह बहुत खतरनाक संकेत है और वहां की भावना की गहराई को दिखाता है। यह अत्यंत संवेदनशील मामला है।” गहलोत ने कहा, “सत्ता और विपक्ष दोनों ही महिला आरक्षण चाहते हैं। लेकिन जिस तरह से परिसीमन को आगे बढ़ाया जा रहा है, उस पर सवाल उठते हैं। 2021 में जनगणना क्यों नहीं कराई गई? अब अधिकारी कहते हैं कि इसे एक साल में पूरा किया जा सकता है।”

2011 जनगणना आधार बनाने पर जताई आपत्ति

गहलोत ने संसद की कार्यवाही के समय पर भी सवाल उठाए और सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, फिर भी संसद बुलाई गई। विपक्षी नेताओं ने चुनाव खत्म होने तक इंतजार करने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार जल्दबाजी कर रही है। इससे उनकी नीयत पर संदेह होता है।” उन्होंने 2011 की जनगणना को आधार बनाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “पहले कहा गया था कि नई जनगणना के आधार पर इसे लागू किया जाएगा। अब अचानक 2011 की जनगणना का हवाला दिया जा रहा है। यह असंगति उचित नहीं है।”

गहलोत ने कहा कि केंद्र की रणनीति विपक्षी दलों को कठिन स्थिति में डालने की हो सकती है। उन्होंने कहा, “यदि विधेयक पारित नहीं होता है तो दोष विपक्ष पर डाला जा सकता है। ऐसी रणनीति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।” केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद की विशेष बैठक बुलायी है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन संबंधी मौजूदा कानून को बदलने वाले विधेयक पेश किए जाएंगे। (भाषा)

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