स्वाध्याय वाचना से क्षय होते हैं भीतर के दुर्गुण : सुमंगलप्रभाजी
हैदराबाद, सच्चे एवं शुद्ध उच्चारण के साथ स्वाध्याय के वाचन से हमारी सोच भी नकारात्मकता से सकारात्मक बनती है, भीतर में क्रूरता का विनाश होता है और वासना विकारों के ऊपर उठकर स्वाध्याय के माध्यम से जीवन में विजय प्राप्त करेगा।उक्त उद्गार सिकंदराबाद स्थित मारुति विधि जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने व्यक्त किए।
पूज्यश्री ने कहा कि स्वाध्याय से जीवन का प्रांगण आंगन पवित्र होता है और त्याग और वैराग्य को अभिवृद्धि को प्राप्त करवाता है। स्वाध्याय हृदय का श्रृंगार है, तनाव मुक्ति का आधार है, जीवन जीने की सम्यक कला का वरदान है। जो स्वाध्याय के ज्ञान पूर्वक निकट में रहता है, वह परमात्मा के निकट भी पहुँच जाता है। स्वाध्याय को जो संभाल कर ग्रहण करता है, प्रतिदिन ध्याता है, वह सच्चे जौहरी के भांति जीवन को बना लेता है।
स्वाध्याय वाचना से मिटे अज्ञान का अंधकार
तीर्थंकर परमात्मा भी स्वाध्याय कर संपूर्णता को प्राप्त होते हैं। स्वाध्याय से व्यक्ति का प्रतिष्ठा का भाव बनता है और सिद्ध अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं। स्वाध्याय के पांच अंग बताये गये हैं। इसमें वाचना, प्रक्षणा, परावर्तन, अनुप्रेक्षा और धर्म कथा शामिल हैं। जो स्वाध्यायी पाँचों को सांगोपांग ग्रहण कर लेता है, वह ज्ञानावरणीय कर्म की निर्जरा करता है । म.सा. ने कहा स्वाध्याय के पहला अंग है वाचना। स्वाध्याय की वाचना करने से जीवन के भीतर श्रुत का सवेरा होता है।
इस दौरान हमारे अंतर तम आत्मा के भीतर अज्ञान का अंधकार मिटता है। स्वाध्याय के प्रथम अंग वांचना को जीवन में ग्रहण करें। म.सा. ने कहा वाचना से जीव कर्मों की निर्जरा होती है। इस दौरान श्रुत वाचन से अनुवर्तन होने से आसातना नहीं होती। श्रुत के अनुवर्तन से आसातना से बचता हुआ जीव तीर्थ धर्म का अवलंबन कर कर्मों की महा निर्जरा करता है। कर्म का सर्वथा क्षय कर लेता है। स्वाध्याय की वाचना के समय व्यक्ति का शरीर स्वस्थ होना चाहिए।
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स्वाध्याय वाचना से शुद्ध उच्चारण और पवित्रता
काया स्वस्थ्य होगी, तभी मन वाचना से उमंग जगेगी और पुरुषार्थ का भाव जागृत होगा। स्वाध्याय निरोगी काया से होने पर हृदय मानस में तीव्र लगन प्राप्त होगी। म.सा. ने कहा कि जब प्रबल भावना से वाचना ली जाती है, तो शक्ति प्रचंड हो जाती है। वाचना को समझने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वह पापभीरू हो, पापों से बचते रहे। म.सा. ने कहा कि महापुरुषों ने कहा है कि वाचना के समय शब्द के उच्चारण की शुद्धता होनी चाहिए।
स्वाध्याय करने वाले को वाचना लेते वक्त मात्र बिन्दी का पूर्ण विवेक के साथ परिशुद्धता का ध्यान रखना होगा। पढ़कर समझें, इससे उच्चारण शुद्ध होगा। पढ़ें और उसके अर्थ भी अच्छी तरह से समझें, फिर लिखें। सुनते समय ध्यान इधर उधर न भटके, इसके लिए एकाग्रता होनी चाहिए। स्वाध्याय वाचना के द्वारा संचित दुष्कर्म भी क्षय हो जाते हैं, विचार पवित्र होते हैं, बुद्धि प्रज्ञा भी परिष्कृत होगी, शुद्ध बनती है।
धर्म सभा का प्रारंभ पैंसठिया छंद जाप से हुआ। सभा का संचालन करते हुए श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद से नितिन अलिजार ने बताया कि अंबेश गुरु मेवाड़ संघ के सहयोग से जारी जाप में आज प्रभावना अंतिम, हीरालाल चौहान परिवार की ओर से प्रदान की गई। संघ की ओर से उनका आभार व्यक्त किया गया। कल, गुरुवार से जाप श्री गुरु गणेश यात्रा संघ के सहयोग से रहेगा। महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि शुक्रवार, 12 सितंबर को साध्वी भगवंत की निश्रा में जाप का पूर्णता रहेगा। जाप सुबह 8.45 बजे प्रारंभ होगा।
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