emotional poetry
-
कविता
हादसों पे हादसे
(कविता) हवइ जहाज़ में जल्को(1) मरे जो, क्या-क्या थे उनके अरमाना।जो ह़क़ीकत में ज़िंदा थे, थोड़ी देर में बने फ़साना।।…
और पढ़ें »
(कविता) हवइ जहाज़ में जल्को(1) मरे जो, क्या-क्या थे उनके अरमाना।जो ह़क़ीकत में ज़िंदा थे, थोड़ी देर में बने फ़साना।।…
और पढ़ें »
(कविता) गांधी के गुजरात में एक अनहोनी घटना घटी है।कितनी जानें गईं साथ में यमराज की छाती भी फटी है…
और पढ़ें »
कोरे काग़ज़ पे हस्ताक्षर,मौत का फ़रमान न बन जाए,कोरे काग़ज़ पे हस्ताक्षरज़िंदगी की शाम न बन जाए।। स्वार्थी, मतलबी दुनिया…
और पढ़ें »
हर बात में त़कदीर पे रोने से क्या बने।हिम्मत न हो तो सब कुछ होने से क्या बने।। अपनी भी…
और पढ़ें »
संवेदनाओं की औंधसोशल मीडिया की चकाचौंधरिश्तों के खट्टे-मीठे सौंधउलझते हुए संवादों पर पुन मौन उम्र की तहज़ीब और तहरीरतेरी याद…
और पढ़ें »