ग़म की बदरी कहाँ छंटी है
(कविता)
गांधी के गुजरात में एक अनहोनी घटना घटी है।
कितनी जानें गईं साथ में यमराज की छाती भी फटी है
कितने अरमानों से सब फ्लाइट में हुए होंगे सवार
ख़ुशियाँ जोश भरा हर दिल में जाना सात समंदर पार
वो दूरी नहीं पटी अकाल मृत्यु की खाई पटी है
गांधी के गुजरात में आज अनहोनी घटना घटी है
पहलगाम आतंकी हमला चारमीनार का अग्निकांड
उन मौतों को भूले ही कहाँ, उनसे बड़ा हुआ यह कांड
अहमदाबाद से उड़ान भर कुछ सेकंडों में पलटी है
गांधी के गुजरात में आज अनहोनी घटना घटी है
चिरनिद्रा में सो गए जो आत्मा उनकी शांति पाए
जिनके घरों के दीप बुझे हैं दु:ख सहने की शक्ति पाए
क्रूर काल के साथ मानो मौत भी आकर डटी है
सिलसिलेवार घटी घटनाएँ ग़म की बदरी कहाँ छंटी है।
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-सरला प्रकाश भुतोड़िया
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