राधे-राधे या राम-राम उच्चारण में निहित है पुण्य कर्म

जब भी हम किसी से मिलते हैं तो नमस्कार, प्रणाम, राम-राम, खमा गणी या जय जिनेंद्र कहते हैं। ये सामने वाले व्यक्ति को सम्मान देने या उससे मिलने पर अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करने का एक तरीका है, जिसे अभिवादन कहते हैं। हालांकि, कई लोग राधे-राधे भी बोलते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राधे-राधे ही क्यों बोला जाता है? अभिवादन करते समय देवी-देवताओं का नाम एक बार भी लिया जा सकता है, फिर भी राधे-राधे क्यों बोलते हैं? यहाँ इस संबंध में विचार व्यक्त किए जा रहे हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा और कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। हम एक बार राधे बोलते हैं, तो वो राधा का भाव होता है, जबकि दूसरी बार बोला गया राधे का भाव कृष्ण के लिए होता है। ऐसे में व्यक्ति को राधा और कृष्ण दोनों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
राधे-राधे बोलने के लाभ
इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मानसिक शांति मिलती है। वाणी में मिठास आती है। वातावरण भक्तिमय होता है। धीरे-धीरे अहंकार कम होने लगता है, जिससे प्रेम में बढ़ोतरी होती है। पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
राम-राम क्यों बोला जाता है ?
हिन्दी शब्दावली के अनुसार, ‘र’ को 27वां स्थान, ‘आ’ को 2 स्थान, ‘म’ को 25 वां स्थान प्राप्त है। अतः जब हम 27 जमा 2 जमा 25 को जोड़ेंगे तो 54 की संख्या प्राप्त होगी और जब व्यक्ति दो बार राम बोलता है तो 54 जमा 54 का जोड़ 108 हो जाएगा। धार्मिक दृष्टि से 108 अंक बहुत खास है। किसी भी मंत्र का जाप 108 बार करना फलदायी माना जाता है। जब हम राम-राम बोलते हैं तो हमें एक पूरी माला यानी 108 बार नाम-जाप के बराबर फल मिलता है।
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राम-राम बोलने के लाभ
मानसिक तनाव दूर होता है। एकाग्रता बढ़ती है। मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं, जिससे आत्मबल बढ़ाता है और पुण्य मिलता है।
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