भारत भूमि जैसा स्वर्ग विश्व में कहीं नहीं : चन्द्रप्रभजी

हैदराबाद, नुमाइश मैदान के विशाल पांडाल में हजारों नागरिकों ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र संत चन्द्रप्रभजी म.सा., ललितप्रभसागरजी म.सा. और मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. के सान्निध्य में स्वतंत्रता दिवस महोत्सव मनाया। यहाँ समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शुक्रवार को मैदान में श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने 821 फीट का विशाल तिरंगा राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके अलावा राष्ट्र के सम्मान में अनेक झाँकियाँ निकाली गयीं, जिसमें श्रृंग ऋषि हाई स्कूल, एलएमजी स्मार्ट किड्स हाई स्कूल और स्मार्ट किड्स प्ले एंड प्री स्कूल के बच्चे शामिल थे।

अवसर पर राष्ट्र संत चंद्रप्रभसागरजी ने लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद द्वारा आयोजित 53 दिवसीय प्रवचनमाला के तहत क्या हो हमारा देश निर्माण में योगदान विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए और रोज सुबह उठकर भारत भूमि और इसे आजादी दिलाने वाले महापुरुषों को साष्टांग प्रणाम करना चाहिए। भारत भूमि पर इतने महापुरुषों ने जन्म लिया कि अगर हम भारत की मिट्टी को शीष पर धारण करेंगे, तो वह भी मंदिर के चंदन की चुटकी का काम करेगी। भारत भूमि जैसा स्वर्ग विश्व में कहीं नहीं है।

प्रेम, शांति, भाइचारा, त्याग और तप हमारी नींव

संतश्री ने कहा कि भारत कोई जमीन का टुकड़ा नहीं, वरन एक जीता जागता दर्शन और गौरवपूर्ण संस्कृति है। अनेकता में एकता ही हमारी शान है, इसीलिए हमारा भारत महान है। हमें अपनी पहचान हिन्दू, मुस्लिम, जैन, सिख ईसाई, बौद्ध के रूप में देने के बजाय भारतीय के रूप में देनी चाहिए। देश सबसे पहले है। अगर हम धर्म-भावना से पहले राष्ट्रीय- भावना से भर जाएँ तो भारत पुन विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो सकता है।

संत प्रवर ने कहा कि अहिंसा, प्रेम, शांति, भाइचारा, त्याग और तप हमारी नींव है। अगर पाकिस्तान ने लड़ने की बजाय भारत से हाथ मिलाया होता तो आज भारत-पाकिस्तान विश्व की सबसे बड़ी ताकत बन चुके होते। उन्होंने कहा कि हर देशवासी को यह जरूर सोचना चाहिए कि मैं देश के लिए क्या कर सकता हूँ। हम अपने भारत को स्वच्छ बनाएँ, स्वस्थ बनाएँ, शिक्षित बनाएँ, संस्कारित बनाएँ, समृद्ध बनाएँ और सहयोगी बनाएँ। हम न गंदगी करें न दूसरों को करने दें, यातायात के नियमों व देश के कानूनों का पालन करें। अगर हम सब मिलकर मात्र 10 मिनट देश को समर्पित करें, तो आने वाले 10 सालों में भारत का कायाकल्प हो सकता है।

चन्द्रप्रभजी ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति, जीवन जीने के सिद्धांत, धार्मिक शास्त्र, गाँवों की सभ्यता, सैकड़ों शहर, पुरातात्विक चीजें आदि सब कुछ अनुपम है, अद्वितीय है, पर यहाँ के लोगों का एटीट्यूड बहुत गंदा है। इसके चलते गली-गली में गंदगी , सड़कों पर कचरा और वातावरण प्रदूषित है। दुबई जैसा देश अपने रेगिस्तान की मिट्टी का भी उपयोग करके दुनिया का नम्बर वन देश बन रहा है और हम सर्व संपदा से युक्त होकर भी पिछड़ते जा रहे हैं।

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स्वच्छता संदेश के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

प्रधानमंत्री को सड़कों पर झाड़ू लगाकर हमें साफ सफाई रखने की प्रेरणा देनी पड़ रही है। अब हम खुद आगे आएँ। जैसे हम विदेशों में जाकर न केवल वहाँ की स्वच्छता की तारीफ करते हैं, वरन वहाँ स्वच्छता का पूरा ध्यान भी रखते हैं। हम देश में भी वैसा ही माहौल तैयार करें। जितना हम घरों को साफ-सुंदर रखते हैं, उतना ही घर के बाहर की सड़क को भी साफ रखें।

डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. ने नवकार महामंत्र की सामूहिक प्रार्थना करवाई। कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुति लीसा सुरेश जैन द्वारा दी गई। समारोह का शुभारंभ लाभार्थी शांति बाई, केवलचंद, रमेश कुमार, विमलचंद, विनोद कुमार, विजयराज, अभिषेक, कटारिया मुथा परिवार, खैरताबाद और शांति बाई की प्रेरणा से रणजीतमल, नवरतनमल, दीपक कुमार, कल्पेश कुमार, रुद्र, प्रेक्षित, गुंदेचा परिवार, खैरताबाद, अशोक कोठारी, जिनेन्द्र बाफना द्वारा भगवान महावीर की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम में पधारे विशेष अतिथि सुनील व्यास और देशभर से पधारे हुए श्रद्धालुओं का स्वागत विमल कुमार नाहर, मोतीलाल भलगट, उमेश बागरेचा, प्रदीप सुराणा, अमित मुणोत, पवन कुमार पांड्या, नवरतनमल गुंदेचा, अशोक कुमार नाहर, माणकचंद पोकरणा, विमल मुथा, शोभा देवी नाहर, शोभा रानी भलगट, दीपिका बागरेचा, आरती सुराणा, शीतल मुणोत, कमला पांडया, सूरज देवी गुंदेचा, लाड़ कंवर नाहर, ललिता पोकरणा, सविता मुथा ने किया। मंच संचालन महामंत्री अशोक कुमार नाहर ने किया।

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