भारत को हंटा वायरस से तत्काल कोई सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा नहीं : एनआईवी प्रमुख

नयी दिल्ली, एक क्रूज जहाज पर दो भारतीय नागरिकों के कथित तौर पर हंटा वायरस से संक्रमित होने की चिंताओं के बीच, आईसीएमआर के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने शुक्रवार को कहा कि ये मामले अलग-थलग प्रतीत होते हैं और भारत के लिए तत्काल कोई सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा नहीं है।

कुमार ने कहा कि फिलहाल सामुदायिक प्रसार का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि हंटा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित कृन्तकों (चूहों, गिलहरी आदि) या उनके लार, मूत्र और मल के संपर्क के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। उन्होंने कहा कि लोग आमतौर पर गोदामों, जहाजों, खलिहानों और भंडारण क्षेत्रों जैसे बंद या खराब हवादार स्थानों में कृन्तकों के मूत्र, मल या लार से निकलने वाले विषाणु कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से संक्रमित हो जाते हैं।

“हंटा वायरस के जो मामले सामने आए हैं, वे छिटपुट प्रतीत होते हैं और भारत में तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है।” उनकी यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि एक क्रूज जहाज पर सवार दो भारतीय नागरिक हंटा वायरस से संक्रमित पाये गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दो भारतीय यात्री उस जहाज पर पहचाने गए संदिग्ध संक्रमितों के एक छोटे समूह में शामिल थे, स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क में आए लोगों की निगरानी कर रहे हैं और एहतियाती उपाय किये जा रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अधिकारियों ने बताया कि हंटा वायरस संक्रमण दुर्लभ हैं और आमतौर पर कृन्तकों के संपर्क में आने से होते हैं, न कि मनुष्यों में लगातार फैलने से। कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 के विपरीत, हंटा वायरस मनुष्यों में आसानी से नहीं फैलता है।

“मानव से मानव में संक्रमण अत्यंत दुर्लभ है। आम तौर पर हंटा वायरस, विशेषकर एशिया और यूरोप में पाए जाने वाले, मनुष्यों के बीच नहीं फैलते। सीमित मानव-से-मानव संक्रमण केवल कुछ दक्षिण अमेरिकी उपभेदों जैसे कि एंडीज विषाणु के साथ ही दर्ज किया गया है।”

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने विषाणु के बारे में मीडिया बताया, “हालांकि यह एक गंभीर घटना है, डब्ल्यूएचओ सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को कम मानता है।” उन्होंने कहा कि ऊष्मायन (इंक्यूबेशन) अवधि को देखते हुए, “संभव है कि और भी मामले सामने आएं।”

ऊष्मायन अवधि वह समय है जो किसी रोगजनक (जीवाणु, विषाणु या परजीवी) के संपर्क में आने और लक्षणों के पहली बार प्रकट होने के बीच व्यतीत होता है। उन्होंने कहा कि ऊष्मायन अवधि को देखते हुए, “यह संभव है कि और भी मामले सामने आ सकते हैं”।

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हंटा वायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण इन्फ्लूएंजा, डेंगू या गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी जैसे हो सकते हैं, जिससे प्रारंभिक निदान चुनौतीपूर्ण हो जाता है। भारत की तैयारियों के बारे में कुमार ने कहा कि संदिग्ध मामलों की पहचान करने के लिए देश में पर्याप्त प्रयोगशाला निगरानी क्षमता मौजूद है।

“भारत में आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान और 165 प्रयोगशालाओं के राष्ट्रव्यापी वायरल अनुसंधान और निदान प्रयोगशाला नेटवर्क के माध्यम से हंटा वायरस संक्रमण के निदान की क्षमता मौजूद है, जहां संदिग्ध मामलों की पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर सुविधाएं उपलब्ध हैं।”

कुमार के अनुसार, लक्षण आमतौर पर संक्रमण के संपर्क में आने के एक से पांच सप्ताह बाद दिखाई देते हैं और शुरू में फ्लू जैसी बीमारी से मिलते जुलते हैं। उन्होंने कहा, “सामान्य चेतावनी के लक्षणों में अचानक बुखार, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पेट दर्द और सूखी खांसी शामिल हैं।” (भाषा)

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button