ट्रंप एक महान विदूषक !

इस असार, नाशवान जगत में दुखी, परेशान बंदों के मनोरंजन के लिए ऊपर वाले ने समय-समय पर एक से बढ़कर एक विदूषक पैदा किये हैं। ऐसे ही महान मसखरे चार्ली चैपलिन और लारेल हार्डी को कौन भूल सकता है? इन दोनों ने ही भोले-भाले मूर्ख बनकर लोगों को खूब हंसाया। खूब मनोरंजन किया। उसी तरह राजनीति के ग्लोबल मैदान में भी ऊपरवाले ने पीड़ित – प्रताड़ित जनता के मनोरंजन के लिए धरती पर कई महान मसखरे राजनीतिज्ञ अवतरित किये!

भारत की दृष्टि से मसखरी की इस राजनीतिक विधा को स्व.राजनारायण और आयुष्मान यादववंश कुलदीपक लालू ने खूब पुष्पित-पल्लवित किया! अपने समय में वे भारत की भूखी-नंगी जनता को हंसा-हंसाकर खूब लोट-पोट करते रहे । इन लोगों ने जनता को इतना हंसाया कि सालों तक रोटी, कपड़ा और मकान की अपनी मूल समस्या की तरफ आम जनता का ध्यान ही नहीं गया!

राजनीति के इन महान मसखरों का जोकरपना देख-देखकर दुखी जनता भूखे पेट, नंग-धडंग, ठहाके पर ठहाके लगाने में मस्त रही और इधर ये मसखरे मोटा माल हड़पकर गुलफाम हो गये ! अब जरा ग्लोबल राजनीति की तरफ दृष्टिपात करें तो वर्षों के सूखे के बाद जगत कोतवाल अमेरिका ने एक अभूतपूर्व महान विदूषक-रत्न पैदा किया है! नाम है डोनल्ड जॉन ट्रंप ! वे बहुमुखी राजनीतिक प्रतिभा के धनी तो हैं ही साथ-साथ परमाणु बम सम्पन्न, अस्त्र-शस्त्र निर्माता राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति भी हैं!

डोनल्ड श्री एक चालाक व्यापारी होने के साथ-साथ, बड़बोले-मसखरे राजनीतिज्ञ की मनभावन छवि वाले सारे संसार के ग्लोबल कोतवाल भी हैं ! इतना ही नहीं उनकी रोमांस के बादशाह की छवि को भी कौन टक्कर दे सकता है? उनकी बहुमुखी प्रतिभा को देखकर कभी-कभी तो समझ में नहीं आता कि वह क्या हैं और क्या नहीं हैं? उनमें भगवान विष्णु-भक्त भारत के महान ऋषि नारद की नारदीय प्रतिभा भी कूट-कूटकर भरी हुई है!

नोबेल की चाह में वैश्विक धौंस और दिखावा

आजकल तो सारे विश्व में जनाब ट्रंप के ही चर्चे हैं और हर तरफ अपना नाम सुनकर उन्हें काफी मज़ा भी आता है। वे तो खुद चाहते हैं कि हर कोई उनका नाम जपे, उनका स्मरण करे और जो न करे उसे तो वह खुद याद दिला देते हैं और वैसे भी उन्हें अपने मुंह मिया मिट्ठु बनने में भी काफी मज़ा आता है और अगर कोई दूसरा उनका गुणगान न करे तो वे खुद ही करने लग जाते हैं।

किन्हीं दो देशों को लड़ा देना, फिर कृपापूर्वक लड़ने के लिए उन्हें अपने देश में बने संहारक अस्त्र-शस्त्र मुहैया करवाकर करोड़ें-अरबों डॉलर कमाना! अंत में शान्ति की अपील करते हुए उनका युद्ध रुकवाना और नोबल पुरस्कार के लिए अपने आपको सबसे उपयुक्त व्यक्ति बताना! ये पेंचदार काम सिर्फ उन्हीं के वश की बात है! भारत-पाकिस्तान में युद्ध रुकवाने का श्रेय भी वे हफ्ते -दो-हफ्ते में एक बार लेते ही रहते हैं !

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-कस्तूरी दिनेश
-कस्तूरी दिनेश

शान्ति के नोबल पुरस्कार के लिए उनकी बेचैन आत्मा की छटपटाहट ड्रग-के विरह में ड्रग-एडिक्ट की तरह है! उनकी बॉडी मोहल्ले के खाए-पले भाईगिरी करनेवाले ऐसे पहलवान के माफिक है जो अक्सर मोहल्ले में किसी न किसी को जब पाए तब धौसियाते ही रहता हैं । ग्लोबल लेबल पर उनकी भाईगिरी की यह धौसियाहट अभी बेचारे ईरान पर तारी है ! कुछ दिन पहले तक वे अपने सूट की जेब से टैरिफ-बम निकाल-निकालकर सभी देशों को चमकाया करते थे पर अब धीरे-धीरे यह टैरिफ-बम भी टिकली फटाका में परिवर्तित होकर फुस्स हो गया है !

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