उत्तम कुमार रेड्डी ने दिये एसएलबीसी पर चौबीसों घंटे काम के निर्देश
हैदराबाद, सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने एसएलबीसी (श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल) सुरंग परियोजना पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ चौबीसों घंटे कार्य संचालन और मशीनरी की तत्काल तैनाती पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने एसएलबीसी सुरंग परियोजना तथा कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के अंतर्गत मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला बैराजों के पुनर्वास पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि एसएलबीसी सुरंग के शेष हिस्से के लिए एनजीआरआई के सहयोग से एरियल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (एईएम) सर्वेक्षण किया गया और उसकी रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इसके परिणाम उत्साहजनक हैं और महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक आंकड़ों से आवश्यक सुरंग सहायक प्रणालियों का आकलन करने और संभावित प्रतिकूल भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों की अग्रिम पहचान करने में मदद मिलेगी।
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उन्नत तकनीकों से शेष एसएलबीसी सुरंग कार्य के निर्देश
मंत्री ने निर्देश दिये कि शेष सुरंग कार्य उन्नत सुरंग निर्माण तकनीकों और प्रेक्षणात्मक विधियों पर आधारित वैज्ञानिक तरीकों से किए जाएं, ताकि निरंतर निगरानी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित हो सके। परियोजना प्रबंधन को मजबूत करने के लिए उन्होंने एक अलग एसएलबीसी डिवीजन के गठन की घोषणा की और संचालन के लिए एक मुख्य अभियंता की नियुक्ति के आदेश दिए।
साथ ही उन्होंने सुरक्षा, गुणवत्ता और डिजाइन अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र पर्यवेक्षण सलाहकार की नियुक्ति का भी निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि दैनिक और साप्ताहिक प्रगति की निगरानी के लिए विशेष योजना दल गठित किए जाएंगे, जबकि सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के सुरंग सुरक्षा पर्यवेक्षकों को स्थल पर तैनात किया जाएगा।
उत्तम कुमार रेड्डी ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना के बैराजों के पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के लिए तकनीकी संस्थानों और डिजाइन सलाहकारों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान स्टेशन की परीक्षण समय-सारिणी को परियोजना डिजाइनरों के कार्य से समन्वित किया जाए, ताकि समय पर तकनीकी मान्यता मिल सके। साथ ही निर्देश दिये कि 16 फरवरी के बाद एनडीएसए की विशेषज्ञ समिति के साथ बैठक आयोजित की जाएग और संरचनात्मक, हाइड्रोलिक तथा उपचारात्मक पहलुओं को शामिल करते हुए व्यापक तकनीकी प्रस्ताव तैयार किए जाएँ।
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