संत-महापुरुषों की कृपा बिना बह्मज्ञान की प्राप्ति नहीं : डॉ. श्याम सुंदरजी
हैदराबाद, जो इस लोक और परलोक में परमसुखी रहना चाहता है, उसे ऋषि-मुनियों द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए। संत-महापुरुषों की कृपा के बिना बह्मज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। उक्त उद्गार बद्रीप्रसाद बाबूलाल रामकिशन राजेंद्र अग्रवाल (महेंद्रा हिल्स) द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा का श्रवण कराते हुए कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशरजी, वृंदावन ने व्यक्त किए।







डॉ. श्याम सुंदर पाराशरजी ने कहा कि हरि का नाम जप करके ध्रुवजी महाराज ने अचल पद प्राप्त किया। वह आज भी आकाश में ध्रुव तारा बनकर दैदीप्तमान हैं। हमें भी भगवान के प्रति अनन्य भाव रखते हुए उनका कृपापात्र बनने का प्रयास करना चाहिए। ठाकुरजी को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए सभी जीवों के प्रति दया का भाव, प्राप्त को पर्याप्त समझकर संतुष्ट व प्रसन्न रहने के साथ अपनी दसों इंद्रियों पर नियंत्रण करना चाहिए। इन तीनों को धारण करके जनार्दन की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है। भरतजी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा संपूर्ण जीवन की परीक्षा अंत में होती है। अंत में चिंतन जहाँ होता है, वही अगले जन्म का कारण बनता है।
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श्रीमद्भागवत कथा में शक्ति और भक्ति का संदेश
डॉ. श्याम सुंदर पाराशरजी ने कहा कि देवताओं का शरीर चाँदी के समान और मनुष्य लोहे के समान होता है। यदि मनुष्यरूपी लोहे से यदि संत रूपी पारसमणि का मिलन हो जाए, तो मनुष्य देवताओं को पार करके दिव्यधाम जा सकता है। देवता कहते हैं कि स्वर्ग में भोग साम्रगी भरपूर होती है, लेकिन कल्याण के मार्ग का कोई साधन नहीं होता, जो मनुष्यों के पास सुलभ है। अजामिल कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण और भजन किसी भी प्रकार किया जाए, उदारमना ठाकुरजी कृपा से कल्याण कर देते हैं।
पाराशरजी ने समुद्रमंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता के कल्याण के लिए महान शक्ति हमेशा पात्र हाथों में होनी चाहिए। अविवेकी तथा अपात्र शक्ति का दुरुपयोग कर सकते हैं। आज के संदर्भ में भी यह बात प्रासंगिक है। शक्ति ऐसी हो, जिसमें आत्मरक्षा का बल हो, न कि दूसरों का अहित करने वाली भावना का समावेश हो। प्रसंग को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान समदर्शी होते हैं, जो नाता हम बनाएँगे वही भक्तवत्सल भगवान हमसे भी निभाएँगे। रविवार की कथा में भगवान कृष्ण के जन्म कथा सुनाते उन्होंने कहा कि प्रभु के जन्म के साथ हर ओर आनंद ही आनंद छा गया। अवसर पर बधाई भी गाई गई। अवसर पर राजेंद्र अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, रितेश अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, परिवार सदस्यों सहित अन्य ने श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का आनंद लिया।
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