वुशु फाइटर नम्रता ने रचा इतिहास
यह कहानी है, एक ऐसी लड़की की जो छोटे शहर से बड़े सपने लेकर निकलती है। वह हर प्रकार की विपरीत स्थितियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल करती है और वह है- भारत की वुशु एथलीट नम्रता बत्रा, जिन्होंने हाल ही में चेंगदू में आयोजित वर्ल्ड गेम्स में रजत पदक जीता है। वुशु स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक है। नम्रता का जन्म इंदौर के पुरातनपंथी परिवार में हुआ। वह मार्शल आर्ट्स में अपना कॅरिअर बनाने की इच्छुक थीं, लेकिन उनके परिवार द्वाऱा इसका जबरदस्त विरोध किया गया।
नम्रता को इस खेल से जुड़ी धारणाओं, विशेषकर छोटे कपड़ों को लेकर चिंता थी। उन्हें यह भी डर था कि अगर इस खेल में नम्रता के शरीर, खासकर चेहरे पर कोई गंभीर चोट आ गई, तो उसके ब्याह में अवरोध उत्पन्न होंगे, लेकिन नम्रता के व्यापारी पिता संजय बत्रा ने अपनी बेटी का निरंतर साथ दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि समाज का दबाव उसकी महत्वाकांक्षा और देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतने में बाधक न बने।
नम्रता बनीं वर्ल्ड गेम्स में वुशु पदक जीतने वाली पहली भारतीय
नतीजतन इस वर्ष 12 अगस्त को नम्रता ऐसी पहली भारतीय बनीं, जिन्होंने वुशु में वर्ल्ड गेम्स पदक हासिल किया। चेंगदू, चीन में नम्रता 52 किलो (सांडा) के महिला वर्ग में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने रजत पदक जीता। भारत ने वर्ल्ड गेम्स के विभिन्न सत्रों में अभी तक कुल सात पदक जीते हैं- 1 स्वर्ण, 2 रजत व 4 कांस्य। चीन से लौटने के बाद नम्रता ने बताया, मेरा संबंध संयुक्त परिवार से है। मेरे दादा-दादी को पसंद नहीं था कि अपने सपने को साकार करने के लिए मैं शॉर्ट्स व स्कर्ट्स पहनूं।
शुरुआत में उन्होंने मुझ पर बहुत पाबंदियां लगायीं। वह मुझे अकेले ट्रेनिंग के लिए भी नहीं जाने देते थे। किसी भी प्रतियोगिता में उन्होंने मुझे कभी अकेले नहीं जाने दिया। उनको बस यही चिंता रहती थी कि लोग क्या कहेंगे? वह तो केवल यह चाहते थे कि मैं अच्छी शिक्षा प्राप्त करूं, ताकि मुझे कहीं स्थायी नौकरी मिल जाए और किसी अच्छे घर में रिश्ता हो जाए, लेकिन मेरे पिता ने हमेशा साथ दिया, मेरी मदद की।
विरोध से सराहना तक : नम्रता को मिला परिवार का साथ
मेरे पिता ने मेरे इस फैसले का समर्थन किया। आज मेरे दादा-दादी और वह लोग जो मेरा विरोध करते थे, मेरी उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं। अब मेरी यात्रा में मुझे उनका पूर्ण समर्थन प्राप्त है। वर्ल्ड गेम्स में रजत पदक जीतने के अतिरिक्त नम्रता ने पिछले साल एशियन चैंपियनशिप्स में भी रजत पदक जीता था। इस साल के शुरू में एशिया कप में कांस्य पदक जीता था।
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मास्को वुशु स्टार चैंपियनशिप्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था और नेशनल गेम्स के दोनों (उत्तराखंड व गुजरात) सत्रों में भी वह पोडियम तक पहुंचीं। नम्रता 2015 से 2018 तक जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन रहीं और सीनियर वर्ग में भी उनकी यह कामयाबी जारी रही कि 2018 से 2021 तक 48 किलो वर्ग के स्वर्ण पदक उनके हिस्से में आये। इसके बाद 2022 से वह 52 किलो वर्ग में खेल रही हैं और अपनी सफलता को निरंतर जारी रखे हुए हैं।
-सारिम अन्ना
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