जगन्नाथ पुरी में विराजते हैं यमराज (धर्म ज्ञान)
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ भगवान विष्णु के अवतार हैं। इनकी पूजा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ होती है। देशभर में भगवान जगन्नाथ के कई मंदिर हैं, जिनमें ओडिशा के पुरी में स्थित मंदिर को चार धाम में से एक माना जाता है।
इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं। हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में इस मंदिर से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होती है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस उत्सव में शामिल होने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है।
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साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। जगन्नाथ पुरी को पृथ्वी का बैकुंठ कहा गया है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीहरि वास करते हैं। इसलिए जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से भक्तों को सभी पापों से छुटकारा मिलता है।
यमराज का वास, जगन्नाथ की सीढ़ी पर – एक अनसुनी कथा
पौराणिक कथा : प्राचीन समय की बात है। यमराज कुछ परेशान से भगवान जगन्नाथ के पास आए और कहा, जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने से सभी पाप दूर होते हैं और कोई भी यमलोक नहीं आता।
उनकी बात सुनकर भगवान जगन्नाथ ने कहा, जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर आप अपना स्थान ग्रहण करें, जिसे यमशिला के नाम से जाना जाएगा। जो श्रद्धालु मेरे (जगन्नाथ) दर्शन करने के बाद इस सीढ़ी पर पैर रखेंगे, तो उन्हें पापों से छुटकारा मिलेगा, लेकिन यमलोक प्राप्त होगा।
यह सीढ़ी मंदिर के प्रमुख-द्वार से प्रवेश करते समय नीचे से तीसरी है, जिसे यमशिला कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद इस सीढ़ी पर पैर रखने से सभी पाप दूर हो जाएंगे, लेकिन यमलोक जाना पड़ेगा। इसी वजह से जगन्नाथ पुरी मंदिर की 22 सीढ़ियों में से दर्शन करने के बाद नीचे से तीसरी सीढ़ी पर पैर रखने की मनाही है।
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