एआईजी हॉस्पिटल्स ने लांच किया `बीट द हीट’ अभियान

हैदराबाद, तेलंगाना के कई जिलों में इन दिनों गर्मी चरम पर है। इस स्थिति को देखते हुए एआईजी हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स ने `बीट द हीट’ नामक जन-जागरूकता अभियान लांच किया है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को गर्मी अथवा हीट स्ट्रोक से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, उनके शुरुआती लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में सजग तथा सचेत करना है।

हीट स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें शरीर तापमान को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता खो देता है, जो सामान्य बुखार से बिल्कुल अलग है। बुखार में शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र सक्रिय रहता है, लेकिन हीट स्ट्रोक में यह प्रणाली विफल होने लगती है, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और माँसपेशियों को तेजी से नुकसान पहुँचा सकती है।

इसके परिणामस्वरूप मानसिक संतुलन बिगड़ना, दौरे पड़ना या अंगों का काम बंद करना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इस कड़ी में लांच बीट द हीट अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता को ऊष्मा थकावट से लेकर ऊष्मा आघात तक की प्रक्रिया को समझने में मदद करना है। एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसके लिए जन-जागरूकता बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग इसे सामान्य थकान या डिहाइड्रेशन समझने की भूल करते हैं, जबकि यह तेजी से मस्तिष्क, हृदय और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। हमारे इस अभियान के माध्यम से अस्पताल का लक्ष्य लोगों को खतरे के संकेतों को जल्दी पहचानने, परिवार के कमजोर सदस्यों की सुरक्षा करने और आपात स्थिति में शुरुआती मिनटों में सही प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने में मदद करना है।
हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी
इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. प्रवीण कुमार कोपुला ने कहा कि हीट स्ट्रोक की सबसे बड़ी चुनौती इसकी शुरुआत का सामान्य महसूस होना है। अक्सर थकान, चक्कर आना, जी मिचलाना, सिरदर्द या माँसपेशियों में खिंचाव जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अत्यधिक गर्मी के बावजूद पसीना न आना, भ्रम की स्थिति, बोलने में लड़खड़ाहट, बेहोशी या बार-बार उल्टी होना जैसे लक्षण अंगों पर पड़ रहे भारी तनाव का संकेत हैं। ऐसी स्थिति में घर पर आराम करने या स्थिति के स्वत ठीक होने का इंतजार करना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना अनिवार्य है।
आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. इमरान शरीफ ने प्राथमिक उपचार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हीट स्ट्रोक में शुरुआती कुछ मिनट बेहद नाजुक होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करते हुए शरीर को तुरंत ठंडा करना है। जानकारी देते हुए कहा गया कि अत्यधिक गर्मी के दौरान कुछ विशेष समूहों को अधिक खतरा होता है। इनमें बुजुर्ग, शिशु, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, बाहरी काम करने वाले लोग, यातायात कर्मी, खिलाड़ी, अकेले रहने वाले लोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारी, मोटापा, तंत्रिका संबंधी रोग या हृदय रोग से पीड़ित लोग शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गर्मी हृदय रोग और मधुमेह जैसी अंतर्निहित बीमारियों को बढ़ा सकती है।
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चिकित्सकों द्वारा आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील
एआईजी हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स बीट द हीट जन जागरूकता अभियान के तहत उन सरल निवारक उपायों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिन्हें हर परिवार अपना सकता है। इनमें नियमित रूप से पानी पीना और प्यास लगने का इंतजार न करना, सुबह देर से लेकर दोपहर तक सीधी धूप से बचना, हल्के रंग के और हवादार कपड़े पहनना, बाहर टोपी या छाते का उपयोग करना, बार-बार आराम करना, भीषण गर्मी के दौरान ज़ोरदार व्यायाम से बचना, परिवार के बुजुर्ग सदस्यों का ध्यान रखना, भीषण गर्मी के दौरान शराब और कैफीन के अत्यधिक सेवन से बचना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि बच्चों और पालतू जानवरों को कभी भी खड़ी गाड़ियों के अंदर न छोड़ा जाए।
एआईजी हॉस्पिटल्स के चिकित्सकों ने लोगों से हीट स्ट्रोक से बचने के लिए आवश्यक सावधानियाँ अपने की अपील करते हुए कहा कि इससे जुड़े किसी भी प्रकार के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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