नराकास हैदराबाद की 18वीं अर्धवार्षिक बैठक में हिंदी कार्यान्वयन पर जोर
हैदराबाद, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (पें.स.का.-1), हैदराबाद की 18वीं अर्धवार्षिक बैठक का आयोजन आज राष्ट्रीय त्वचा रोग यूनानी चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद में किया गया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संस्थान के निदेशक एवं नराकास के अध्यक्ष डॉ. नजीबुल हसन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, राजभाषा विभाग, भारत सरकार के उप निदेशक (कार्यान्वयन) अनिर्बान कुमार विश्वास उपस्थित थे।
नराकास के सदस्य कार्यालयों के प्रमुख विजय वी. मुगल, भास्कर थुबे, डॉ. मिलिनी दिवाकला शेट्टी एवं सत्यनारायणा की उपस्थिति रही। बैठक के प्रारंभ में समिति के सदस्य सचिव डॉ. मु. काशिफ हुसैन ने सभी का स्वागत किया। अधिकारियों के स्वागत सम्मान उपरांत अपस्थित अधिकारियों तथा कर्मचारियों के परिचय के साथ बैठक की शुरुआत की गई। डॉ. मु. काशिफ हुसैन ने समिति की पिछली बैठक का कार्यवृत्त एवं उसमें लिये गये निर्णयों के अनुसार की गई अनुवर्ती कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे मुख्य अतिथि अनिर्बान कुमार विश्वास ने स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य अतिथि ने नए सदस्यों का किया स्वागत
सदस्य सचिव ने राजभाषा विभाग द्वारा नराकास के सभी सदस्य कार्यालयों की समीक्षा के लिए प्रेषित पीपीटी के नये प्रारूप में पीपीटी प्रस्तुति करते हुए सदस्य कार्यालयों के प्रदर्शन का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि समीक्षाधीन छहमाही के दौरान 13 नये कार्यालयों ने नराकास की सदस्यता ग्रहण की, जो काफी उत्साहवर्धक है। मुख्य अतिथि ने इस पर संतोष जताते हुए नये सदस्य कार्यालयों के उपस्थित अधिकारियों का स्वागत किया।
अनिर्बान कुमार विश्वास ने जिन कार्यालयों ने अभी तक राजभाषा नियम 10(4) के अंतर्गत स्वयं को अधिसूचित नहीं किया, उन्हें शीघ्र अधिसूचित करवाने का आग्रह करते हुए कहा कि इस मद को संसदीय राजभाषा समिति द्वारा गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि आजादी के 77 वर्ष बाद भी यदि हम हिन्दी में कामकाज करने में स्वयं को असमर्थ बताते हैं, तो यह काफी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा ही हमारी संस्कृति और पहचान होती है।
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बैठक के कार्यवृत्त में मुद्दे शामिल करने के निर्देश
इसके बाद मुख्य अतिथि ने उपस्थित अधिकारियों तथा कर्मचारियों द्वारा पूछे गये विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देकर उनका समाधान किया। साथ ही आवश्यक मुद्दों को बैठक के कार्यवृत्त में शामिल करने का निर्देश दिया। अनिर्बान कुमार विश्वास ने कहा कि संसदीय राजभाषा समितियाँ वर्तमान में काफी गंभीरता से केंद्र सरकार के कार्यालयों का निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन में गंभीरता नहीं दर्शाने वाले कार्यालयों के प्रमुखों को समिति द्वारा कड़ी फटकार भी लगाई जा रही है।
अनिर्बान कुमार विश्वास ने सभी कार्यालय प्रमुखों से निवेदन किया कि उन्हें अपने कार्यलयों में कार्यरत राजभाषा अधिकारियों को समुचित कामकाज करने का पूरा अवसर देना चाहिए तथा उनकी रिपोर्टिंग अपने पास रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजभाषा अधिकारी की पहुँच कार्यालय प्रमुख तक रही, तो उनके कार्यालय में राजभाषा का कार्यान्वयन बेहतर ढंग से होना संभव होता है।
समिति के अध्यक्ष डॉ. नजीबुल हसन ने नराकास के अध्यक्षीय कार्यालय के रूप में राष्ट्रीय त्वचा रोग यूनानी चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानाकारी देते हुए इसमें सभी सदस्य कार्यालयों से प्राप्त हो रहे सहयोग के लिए उनके योगदान की सराहना की। राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान के हिन्दी अनुवादक डॉ. शिरीष कुलकर्णी के धन्यवाद ज्ञापने के साथ बैठक सम्पन्न हुई।
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