सरकारी समिति की शिकायतों पर कोई निर्णय न लें : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी किया कि संगारेड्डी ज़िले के अमीनपुर मंडल के ऐलापुर गाँव के भू-विवाद पर राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार कोई निर्णय न लिया जाए। गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय को लागू न करने के महत्वपूर्ण आदेश भी जारी किए गए।
इसके संबंध में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजय सेन रेड्डी ने गुरुवार को अंतरिम आदेश जारी किया। संगारेड्डी ज़िले के अमीनपुर मंडल के ऐलापुर गाँव में भूमि विवाद को लेकर सरकार की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार ने गत 15 अप्रैल को जारी एक आदेश के जरिए संगारेड्डी ज़िलाधीश को समन्वयक बनाकर 7 सदस्यीय समिति का गठन किया था।
इस समिति को ऐलापुर गाँव में सरफ-ए-हास भूमि के मुद्दों की जाँच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी संदर्भ में 98 वर्षीय एम.ए. शरीफ ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि 11 और 12 अप्रैल को हैदराबाद और राजस्व अधिकारियों द्वारा उनकी जमीनों को जबरन ध्वस्त कर दिया गया था।
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कार्यपालिका पर न्यायिक सीमा लांघने का आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता एल. रविचंदर ने इस मामले की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लक्ष्मण रेखा पार कर संविधान निर्धारित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मुरलीधर रेड्डी ने तर्क दिया कि समिति का गठन केवल तथ्यों को एकत्रित करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि यह केवल एक साधारण कार्यपालिका कार्रवाई थी। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक समीक्षा के अधीन है। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद समिति को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सरकार पर शर्त लगाई कि वह समिति द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय को लागू न करें।
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