उस्ताद शुजात खान के साथ एक सुबह
पिछले दिनों हैदराबाद के लोग उस्ताद शुजाअत खान और पंडित राकेश चौरसिया के संगीत से मंत्रमुग्ध हो गए। इस बीच हमें उस्ताद शुजाअत खान से बात करने का मौका मिला। सादे टी-शर्ट पहने, उन्होंने हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले मेरा स्वागत किया। एक स्टार सितार वादक होने या दिग्गज विलायत खान साहब के पुत्र होने का उनमें कोई घमंड नहीं था।
अपनी शर्तों पर जीवन जीने वाले उस्ताद शुजाअत खान का पालन-पोषण और संगीत प्रशिक्षण बहुत ही अनुशासित माहौल में हुआ। मैंने उनसे भारत के वर्तमान संगीत परिदृश्य के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, शास्त्रीय संगीत और ललित कलाएँ विश्वभर में हमेशा से ही अल्पसंख्यक रही हैं। हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि ललित कलाएँ रिक्शा चालक या वेटर को समझ आ जाएँगी। यदि आप शास्त्रीय संगीतकार या गायक बनना चाहते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि यह कोई जनसमर्थन का साधन नहीं है।
संगीत शिक्षा में सरकार की भूमिका पर उन्होंने कहा, हमारी सरकार संगीत और कलाओं के लिए कुछ नहीं करने वाली है, क्योंकि ये समाज में सबसे निचले पायदान पर हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली निष्फल हो चुकी है। पश्चिम में संगीत स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा है। वे छात्रों में स्वाभाविक प्रतिभा को परखकर उन्हें तुरंत प्रोत्साहित करते हैं। हमारा पाठ्यक्रम छात्रों को ऐसी आर्थिक पृष्ठभूमि में नौकरी दिलाने पर केंद्रित है, जहां वास्तविक जीडीपी दिखाई दे।
बॉलीवुड संगीत में बदलाव और व्यक्तिगत दृष्टिकोण
आर. डी. बर्मन, कल्याणजी-आनंदजी जैसे दिग्गजों के साथ बैकग्राउंड म्यूजिक पर काम कर चुके उस्ताद शुजाअत खान को बॉलीवुड संगीत की पूरी प्रक्रिया बेहद पसंद है। गीतकार से संगीत निर्देशक एवं गायक तक, सभी का एक साथ आना एक खूबसूरत अनुभव होता है, लेकिन अब इसमें हो रहे परिवर्तन को लेकर वे चिंतित हैं। मैं अपनी बेटी के साथ बैठकर गाना नहीं सुन सकता। दस में से नौ गाने ऑर्केस्ट्रेशन पर इतने ज्यादा आधारित होते हैं, बोल अश्लील होते हैं।

लंबे समय तक उन्होंने दुनियाभर की यात्रा की। कीथ जैरेट्स, स्टैंड गेट्ज़ आदि कलाकारों के साथ अलग-अलग तरह का संगीत प्रस्तुत किया। मैं दूसरों के पदचिह्नों पर नहीं चलता। मैं स्टूडियो में बैठकर बैकग्राउंड स्कोर बजाने से कुछ ज्यादा करना चाहता था। भारत में उन्हें लंबे समय तक स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि उनके पिता विलायत खान एक महान नाम थे। वे उनके साथ नहीं रहते थे। मुझे एक विद्रोही, एक बागी, एक कृतघ्न बच्चा माना जाता था, लेकिन मैं एक अच्छा जीवन जीना चाहता था। मैं विलासिता और एक अच्छे घर का आनंद लेता हूँ, मैं अपनी पत्नी और बेटी को अच्छे गहने पहनाना चाहता था, जो मैं अपने काम से कमा सकता था।
ए. आर. रहमान विवाद और जीवन में केंद्र बिंदु की अहमियत
ए. आर. रहमान के हालिया विवाद पर उन्होंने कहा, यह उनकी निजी राय है। उन्होंने शायद इसका सामना किया होगा। हर क्षेत्र में भाई-भतीजावाद और राजनीति होती है, जिसका सामना मैंने भी किया। भारत में व्याप्त विविधता के कारण बहुत समस्याएँ हैं, लेकिन इसे दिल पर नहीं लेना चाहिए। रहमान ने जो कहा, वह आवेग में या भावनात्मक रूप से भी हो सकता है। अफवाहों का मतलब मूल कथन का गलत अर्थ निकालना भी हो सकता है। युवाओं के लिए उनकी सलाह है, आज की पीढ़ी बहुत समझदार है, लेकिन उन्हें अपने हर काम के परिणामों को ध्यान में रखना चाहिए।

माता-पिता अपने बच्चों को समय नहीं देते, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपने बच्चों के भविष्य की शिक्षा के लिए पैसा कमा रहे हैं, लेकिन कमल कीचड़ में खिलता है। हर व्यक्ति के पास अपना घर सुधारने का विकल्प होता है। मैंने धूम्रपान तब छोड़ा, जब मुझे एहसास हुआ कि मेरे बच्चे बड़े हो रहे हैं और मुझे उनके लिए नैतिकता स्थापित करनी होगी। उस्ताद शुजाअत खान के लिए संगीत ही परम शरण है। अपने जीवन में कुछ ऐसा खोजें, जो केंद्र बिंदु बन जाए। सब कुछ उसी के इर्द-गिर्द घूमना चाहिए। मेरे लिए संगीत वही केंद्र बिंदु है।
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