एक दिवसीय तृतीय दक्षिण भारतीय साहित्योत्सव का आयोजन

हैदराबाद, युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास), आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना तथा केंद्रीय हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय तृतीय दक्षिण भारतीय साहित्योत्सव का आयोजन केंद्रीय हिन्दी संस्थान के सभागार, बोइनपल्ली में किया गया। डॉ. रमा द्विवेदी (अध्यक्ष, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा) एवं सरिता दीक्षित (महासचिव) ने बताया कि कार्यक्रम डॉ. फत्ताराम नायक (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिन्दी संस्थान) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. ऋषभदेव शर्मा (परामर्शी, हिन्दी मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद), विश्विष्ट अतिथि के रूप में डॉ. राजीव सिंह नयन (शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार), ओम प्रकाश शुक्ल (राष्ट्रीय महासचिव, युवा उत्कर्ष दिल्ली), सम्माननीय अतिथि के रूप में प्रदीप कुमार दत्त (संयुक्त सचिव, हिन्दी महाविद्यालय, हैदराबाद), विवेक बादल बाजपुरी (प्रभारी, उत्तराखण्ड) एवं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमा द्विवेदी मंचासीन थे। अतिथयों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ तृप्ति मिश्रा (सह संयोजिका) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात नगर की वरिष्ठ साहित्यकार स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।डॉ. रमा द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। शॉल-माला और पौधा द्वारा अतिथियों का सम्मान सदस्यों द्वारा किया गया। ओमप्रकाश शुक्ला ने संस्था का परिचय एवं उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। प्रदेश इकाई महासचिव सरिता दीक्षित ने राज्य शाखा की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। गंगा में तैरते मिट्टी के दीये काव्य संग्रह का परिचय देते हुए विशिष्ट अतिथि डॉ. राजीव सिंह नयन ने कहा कि इसका शीर्षक ही लोक-संस्कृति, आस्था, जीवन यात्रा, त्याग, तपस्या आदि के भाव को समेटे हुए है। यह पाठक से अत्यंत गहराई से पठन और चिंतन की माँग करता है।

संग्रह की कविताएँ शिल्प और संरचना में पूर्ण अनुशासित

संग्रह में शिल्प और संरचना की दृष्टि से पूर्णत अनुशासन से बंधी कविताएँ संग्रहित हैं। छंद-अनुशासन, भाव-संयम, प्रतीक-संतुलन का समन्वय इस संग्रह को काव्य-अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है। कृति भावात्मक प्रमाणिकता, संरचनात्मक अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और सहित्यिक गुणों को साथ लेकर चलती है। आश्चर्य यह है कि पाठक इन रचनाओं में डूबता है, तो निकलना नहीं चाहता। तत्पश्चात गंगा में तैरते मिट्टी के दीये काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया ।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कवियित्री डॉ. रमा द्विवेदी की कृति पर विचार रखते हुए कहा कि कम शब्दों में कविता लिखना बड़ी चुनौती है। भाव अगर नहीं होंगे, तो वह रचना केवल वक्तव्य बनकर रह जाएगी, लेकिन डॉ. रमा की कविताओं में गेयता है और पंक्तियों में सुन्दर तारतम्य है। जापानी परिधान में यह भारतीयता का उत्कृष्ट काव्य संग्रह है। उन्होंने कहा कि तैरते दीये काल का प्रवाह है, जिसमें हम सब तैर रहे हैं।

यह प्रवाह सतत गतिशील रहता है, कभी रुकता नहीं है। उन्होंने कहा कि कम शब्दों में अधिक भाव व्यक्त करना कविता की सामर्थ्य होती है। डॉ. रमा ने इस अनुशासन को बहुत अच्छी तरह से निभाया है। विचारों और भावों को प्रतीकों द्वारा चित्रात्मक शैली में ढालना वे अच्छी तरह जानती है। प्रदीप कुमार दत्त और विवेक बादल बाजपुरी ने डॉ. रमा द्विवेदी को उत्कृष्ट काव्य संग्रह के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित कीं। डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि काव्य संग्रह की हर रचना का रंग भारतीय है और संग्रह की सभी रचनाएँ मानवीय संवेदना से सम्पृक्त एवं लोक जीवन के समीप हैं।

यह भी पढ़ें… जिला कलेक्टर ने लांच की ‘प्रॉजेक्ट शक्ति- प्रोवाइडिंग नेक्स्ट शक्ति’ पहल

द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन और प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय ने डॉ. रमा द्विवेदी को उनके काव्य संग्रह के लोकार्पण पर तकनीकी माध्यम से वक्तव्य और सन्देश प्रेषित किया। प्रथम सत्र का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा देवी द्वारा किया गया। द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने की। मुख्य अतिथि डॉ. फत्ताराम नायक, विशिष्ट अतिथि ओमप्रकाश शुक्ल, विवेक बदल बाजपुरी, डॉ. सुरभि दत्त (इकाई कोषाध्यक्ष), महासचिव सरिता दीक्षित मंचासीन थे।

सत्र का संचालन शिल्पी भटनागर (संगोष्ठी संयोजिका) ने किया। काव्य गोष्ठी से पूर्व कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का शॉल-माला से सम्मान किया गया। प्रो. ऋषभदेव शर्मा एवं डॉ. रेखा शर्मा का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया। डॉ. रमा द्विवेदी का सम्मान तेलंगाना साहित्य भारती संस्था, डॉ. राधा कृष्णन स्वयं शिक्षक सहायता समूह, शोभा देशपांडे, उमा सोनी, सविता सोनी तथा कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा शॉल-माला से किया गया।

बी. स्वाति, शकुंतला मिश्रा, मोहिनी गुप्ता, तृप्ति मिश्रा, विनोद गिरी अनोखा, दर्शन सिंह, उमा देवी सोनी, सविता सोनी, भोला सिंह, जीतेन चौहान, डॉ. राजीव सिंह, विवेक बादल बाजपुरी, शोभा देशपांडे, ओम प्रकाश शुक्ल, डॉ. सुरभि दत्त, ड़ॉ फत्ताराम नायक, डॉ. सुषमा देवी, डॉ. रमा द्विवेदी, शिल्पी भटनागर, सरिता दीक्षित ने काव्य पाठ किया। प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोष्ठी में विविध विधाओं की रसयुक्त रचनाओं ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का आभार डॉ. सुरभि दत्त ने जताया। अवसर पर डॉ. रेखा शर्मा, सजग तिवारी, डिम्पल मिश्रा, डॉ. राधा, डॉ. एस.एल. द्विवेदी, डॉ. संदीप, नवीन एवं अन्य उपस्थित थे।

Exit mobile version