अजा एकादशी व्रत भक्त को मिलती जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति

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तिथि मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 18 अगस्त, सोमवार की शाम 5 बजकर 22 मिनट से शुरू हो चुकी है, जो आज दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक है। उदिया तिथि के आधाप पर अजा एकादशी का व्रत आज रखा जाएगा। आज त्रिपुष्कर योग और सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इस कारण यह एकादशी तिथि भी और शुभ योग मानी जाएगी।

एकादशी को शास्त्रां में पापनाशिनी तिथि कहा गया है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है। इसमें सालभर की सभी एकादशियों के व्रत और उसके प्रभाव का गहन वर्णन है। मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का फल खत्म होता है। अजा अर्थात जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त करने वाला। अत: इस एकादशी का व्रत करने से भक्त को मोक्ष मिलता है।

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा या जया एकादशी कहते हैं, जो आज है। इस वर्ष अजा एकादशी मंगलवार को पड़ी है। ज्योतिष में मंगलदेव को मंगलवार का कारक ग्रह कहा जाता है। इसलिए एकादशी और मंगलवार के योग में विष्णु जी के साथ मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।

मंगल की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े दोष हैं, उन्हें शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, लाल फूल और लाल गुलाल चढ़ाना चाहिए और लाल मसूर की दाल का दान करना चाहिए। मंगल के मंत्र ॐ भों भौमाय नम: मंत्र का जप करें।

पूजा विधि

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। ॐ सूर्याय नम मंत्र का जप करें। लाल फूल और चावल अर्पित करें। घर या मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने पूजा और व्रत करने का संकल्प लें। पंचामृत से विष्णु जी को स्नान कराएं, तुलसी के पत्ते अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें। तुलसी को विष्णु प्रिय माना जाता है। बिना तुलसी भगवान विष्णु भोग नहीं स्वीकार करते। एकादशी पर विष्णु जी के साथ ही तुलसी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। सुबह और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं, तुलसी नामाष्टक का पाठ करें। तुलसी की परामा करें, लेकिन सूर्यास्त के बाद तुलसी को स्पर्श न करें।

एकादशी पर दान-पुण्य करें। इससे अक्षय पुण्य मिलता है। गौशाला में दान दें, गायों को हरी घास खिलाएं। तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां डालें। चींटियों को आटा-शक्कर अर्पित करें। पक्षियों के लिए छत पर दाना-पानी रखें। जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, छाता, जूते आदि का दान करें। छोटे बच्चों को मिठाई खिलाएं या भोजन कराएं।

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एकादशी पर जो लोग व्रत करते हैं, वे पूरे दिन अन्न का त्याग करते हैं और दिनभर भगवान के मंत्रों का जप करते हैं। सुबह-शाम विष्णु जी की पूजा करते हैं। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर फिर से पूजा करते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराते हैं। इसके बाद ही स्वयं भोजन करते हैं। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।

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