पॉलीसोम्नोग्राफी तथा निद्रा संबंधी श्वास विकारों पर सम्मेलन आयोजित

हैदराबाद, निज़ाम आयुर्विज्ञान संस्थान (निम्स) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के तत्वावधान में पॉलीसोम्नोग्राफी तथा निद्रा संबंधी श्वास विकारों पर जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। अवसर पर कहा गया कि खर्राटे सोते समय होने वाला केवल एक शोर नहीं है। यह एक गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जिसका इलाज किया जा सकता है।

पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एन. नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन निम्स के निदेशक प्रो. नागरी बीरप्पा ने किया। उन्होंने कहा कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया बहुत ही आम लेकिन अक्सर पहचाना न जाने वाला निद्रा विकार है। हालाँकि यह निद्रा संबंधी विकार हमारे समाज में व्यापक रूप से व्याप्त है, फिर भी कई लोग इसे साधारण थकान या खर्राटों की समस्या समझ लेते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या की उचित पहचान, उपचार से नींद की गुणवत्ता आदि में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

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स्लीप एपनिया पहचान और पॉलीसोम्नोग्राफी का महत्व

प्रो. एन. नरेंद्र कुमार ने कहा कि स्लीप एपनिया नींद के दौरान वायुमार्ग में रुकावट के कारण सांस लेने में आने वाली अस्थायी रुकावट है। इससे नींद की गुणवत्ता तो खराब होती ही है, साथ ही दिन में थकान जैसी समस्याएँ भी होती हैं। आगे चलकर यह उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, सड़क दुर्घटनाओं आदि का कारण बन सकता है। उन्होंने स्लीप स्टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यह परीक्षण रात भर सांस लेने के पैटर्न, ऑक्सीजन के स्तर, हृदय गति और मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। यह परीक्षण बीमारी का जल्द पता लगाने और उचित उपचार प्रदान करने में मदद कर सकता है।

कार्यक्रम में एकेडमी ऑफ स्लीप-वेक साइंस के संस्थापक डॉ. त्रिपत दीप सिंह, आईबीएसटी अध्यक्ष लता आर. कस्तूरी, बीएलडब्ल्यूसी (सिप्ला) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वम्शी वफढष्णा, निम्स के असोसिएट डीन प्रो. चंद्रशेखर, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के कर्मचारी, छात्र एवं अन्य उपस्थित थे।

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