टीवीके को समर्थन पर आज फैसला लेगी माकपा

तमिलनाडु, तमिलनाडु में गजब खेल चल रहा है। सरकार पर सस्पेंस ही सस्पेंस है। थलापति विजय की टीवीके हो या डीएमके या फिर एआईएडीएमके…किसी के पास बहुमत नहीं। ऐसे में तमिलनाडु में सरकार पर पेच फंसा है। थलापति विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, उसके पास बहुमत वाला नंबर नहीं है। यही कारण है कि उसे राज्यपाल सरकार बनाने का न्योता नहीं दे रहे हैं। ऐसे में टीवीके फंसी है कि किसके साथ मिलकर सरकार बनाए। इस बीच डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन वाली खिचड़ी पक रही है। एआईएडीएमके तो खुद एक कदम आगे बढ़कर डीएमके संग गठबंधन करना चाह रही है।

दरअसल, तमिलनाडु की सियासत में लगातार ट्विस्ट दिख रहे हैं। तमिलनाडु में सरकार गठन की प्रक्रिया फंस चुकी है। गुरुवार को इसमें एक नया मोड़ आया। वह यह कि एआईएडीएमके अब टीवीके को सत्ता से दूर रखन के लिए डीएमके संग गठबंधन करना चाह रही है। जी हां, डीएमके नेतृत्व ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके को बाहर से समर्थन देने की संभावना पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया, ताकि टीवीके चीफ विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोका जा सके।

थलापति को रोकने में जुटी डीएमके-एआईएडीएमके?

यह सब तब हो रहा है, जब थलापति विजय किसी भी तरह सरका बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। तमिलनाडु में कुल सीटों की संख्या 234 है। 234 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बंटा हुआ जनादेश आया है। तमिलनाडु चुनाव में टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से पीछे रह गई। डीएमके को 59 सीटें मिलीं, जबकि एआईएडीएमके ने 47 सीटें जीतीं। कांग्रेस, जिसने नतीजों के बाद टीवीके को समर्थन दिया, उसके पास पांच विधायक हैं। कांग्रेस और टीवीके की सीटों को मिला ले तो यह संख्या 113 हो जाती है। हालांकि, थलापति विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है। ऐसे में एक सीट खाली करनी होगी। इससे टीवीके गठबंधन की संख्या 112 रह जाती है।

एआईएडीएमके ने मांगा है साथ

इसक बीच टीओआई की मानें तो डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने विधायक दल की बैठक में बताया कि एआईएडीएमके ने सरकार बनाने और विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए समर्थन मांगा है। इसके बाद विधायकों ने स्टालिन को इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार दे दिया।

तमिलनाडु की सियासी गणित ने अचानक छोटे दलों को किंगमेकर बना दिया है। सीपीआई, सीपीआई(एम) और वीसीके, जिनके पास दो-दो विधायक हैं, अब सरकार बनाने की कवायद में संतुलन की भूमिका में हैं। और दोनों टीवीके और एआईएडीएमके गुट उनका समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं।

डीएमके की बैठक में क्या हुआ?

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके विधायक दल की बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने वीसीके, सीपीआई और सीपीएम नेताओं के साथ चर्चा की, जिसमें एआईएडीएमके के संपर्क का मुद्दा भी उठा। सहयोगी दलों के आज यानी शुक्रवार को आंतरिक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रुख अपनाने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि आज फैसला हो जाएगा। अगर डीएमके चीफ स्टालिन एआईएडीएमके संग गठबंधन का फैसला लेते हैं तो फिर थलापति विजय का सपना चकनाचूर हो सकता है।

दरअसल, एआईएडीएमके तमिलनाडु की सत्ता में आना चाहती है। हालांकि, इसके लिए उसे गठबंधन पर निर्भर रहना पड़ेगा। एआईएडीएमके को अपने सहयोगी पीएमके और एएमएमके के साथ-साथ डीएमके, आईयूएमएल और सीपीआई-सीपीआई(एम)-वीसीके गुट का समर्थन चाहिए होगा। ऐसा होने पर बहुमत का आंकड़ा पार हो जाएगा।

डीएमके-एआईएडीएमके समझौते को वीसीके के समर्थन की संभावना पर पूछे जाने पर वीसीके के एक सीनियर नेता ने कहा, ‘जब टीवीके के नाम पर खतरा है तो स्थिर सरकार देने के लिए एआईएडीएमके और डीएमके क्यों न साथ आएं?’ इसका मतलब है कि तमिलनाडु में कभी भी कुछ भी हो सकता है। वैसे भी कहते हैं कि सियासत और इश्क में सब जायज है। स्टालिन पहले एआईएडीएमके को समर्थन देने के विचार के खिलाफ थे।

अब वह सॉफ्ट दिख रहे हैं। डीएमके में भी कई विधायकों की चाहत एआईएडीएमके संग गठबंधन की है। यही कारण है कि उन्होंने वरिष्ठ पार्टी नेताओं से चर्चा के बाद इस विकल्प पर दोबारा विचार किया है। इसके बाद उन्होंने सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी शन्मुगम, सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरापांडियन और वीसीके नेता थोल तिरुमावलवन को चर्चा के लिए बुलाया। बहरहाल, डीएमके के सीधे तौर पर ऐसी किसी सरकार में शामिल होने की संभावना नहीं है। हालांकि वह बाहर से एआईएडीएमके को सहयोग कर सकती है।(भाषा) 

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