महिला आरक्षण संशोधन विधेयक में परिसीमन लोकतंत्र पर हमला- विपक्ष

तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली, केरल के विपक्षी नेताओं ने बृहस्पतिवार को संसद में पेश किये गये महिला आरक्षण संशोधन विधेयक में परिसीमन प्रावधानों पर अपनी आपत्तियों को दोहराते हुए इसे ‘‘लोकतंत्र पर हमला’’ करार दिया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन और भाकपा नेता एनी राजा समेत विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे संसद की वर्तमान संख्या में महिलाओं के लिए आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसकी आड़ में परिसीमन प्रावधानों को लाने के कदम को स्वीकार नहीं करेंगे।
लोकतंत्र और संघवाद को कमजोर करने का प्रयास
वेणुगोपाल ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘विधेयक में परिसीमन संबंधी प्रावधानों को हम विफल कर देंगे।’ उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य लोकतंत्र की हत्या करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद भी केंद्र अब तक इस पर आगे क्यों नहीं बढ़ा है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘उस समय हम 543 सदस्यीय सदन में आरक्षण लागू करवाना चाहते थे। लेकिन उन्होंने इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें लगा दीं।’ उन्होंने दावा किया कि परिसीमन से केरल की उपेक्षा और भी बढ़ जाएगी।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि परिसीमन प्रावधान पारित होने पर उत्तर भारत के राज्यों के लिए 200 से अधिक सीट और दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए केवल 60 सीट बढ़ेंगी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इसके पीछे मकसद भाजपा को उत्तर भारत के राज्यों से मिलने वाले भारी बहुमत के बल पर देश पर शासन करने देना और दक्षिण भारतीय राज्यों को अलग-थलग करना है।’
भाकपा नेता एनी राजा ने आरोप लगाया कि संशोधन विधेयक में परिसीमन संबंधी प्रावधानों से महिलाओं के लिए आरक्षण के नाम पर देश के लोकतंत्र और संघवाद को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। (भाषा)
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