उत्तराखंड मे चंद्र ग्रहण के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित मंदिरों के द्वार बंद
हरिद्वार, उत्तराखंड में इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व रखता है। ग्रहण के दौरान ‘सूतक’ काल के नियमों का पालन करते हुए कई प्रमुख मंदिरों के द्वार बंद कर दिए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में धार्मिक आस्था की भावना और भी प्रबल हो गई है।
इस दौरान गंगा घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना और गंगा स्नान का भी आयोजन किया गया है, जो भक्तों के लिए एक पवित्र अनुभव साबित हो रहा है। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित सभी मंदिरों के द्वार शनिवार शाम को इस वर्ष के अंतिम चंद्र ग्रहण के सूतक काल के कारण बंद कर दिए गए, जो आधी रात के बाद हुआ।
सूतक काल शनिवार को शाम 4.05 बजे शुरू हुआ, जबकि चंद्र ग्रहण रविवार को सुबह 1.04 बजे शुरू हुआ। हरिद्वार में दक्ष मंदिर, मायादेवी मंदिर, मांसा देवी, चंडी देवी सहित सभी मंदिर बंद रहे। हर की पौड़ी पर शाम को होने वाली गंगा आरती भी सूतक शुरू होने से पहले 3.30 बजे की गई। इस बीच, ग्रहण के अवसर पर गंगा स्नान करने भक्त भी हरिद्वार पहुंचने लगे।
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ज्योतिषी प्रतीक मिश्रपुरी ने कहा कि सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित माना जाता है, इसलिए मंदिरों के द्वार ग्रहण समाप्त होने के बाद सुबह 2.24 बजे खोले जाएंगे और गंगा जल से शुद्धि कर पूजा कार्य शुरू किया जाएगा। (भाषा)
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