इमैनुएल मैक्रों-कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य पर करेंगे शिखर वार्ता

नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन आ रहे हैं। पीएम मोदी ने थोड़ी देर पहले जानकारी दी कि उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुए मैक्रों ने फोन किया था। इस फोन कॉल में दोनों नेताओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत हुई। इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीएम मोदी से फोन पर बातचीत की थी और होर्मुज को लेकर गहन मंथन किया था।
होर्मुज में रुकावट वैश्विक नेताओं की चिंता
ये बातचीत ऐसे समय में हो रहे हैं जब वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक नौकाओं की आवाजाही में रुकावट सीधे तौर पर देश में ईंधन की कीमतों और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। आइए समझते हैं कि कैसे ग्लोबल लीडर्स के बीच हो रही यह कूटनीतिक हलचल भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपकी जेब पर असर डालती है।
मैक्रों की शांति पहल और पेरिस सम्मेलन
आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी से बात की और पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, ‘मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का फोन आया। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वहां से आवाजाही की स्वतंत्रता की तुरंत बहाली की जरूरत पर सहमति व्यक्त की। हम क्षेत्र और उससे इतर भी शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए करीबी सहयोग जारी रखेंगे।’
मैक्रों की ईरानी राष्ट्रपति से भी हुई बात
मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी बातचीत की है। उन्होंने दोनों देशों से वार्ता फिर शुरू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शर्त खोलने का आग्रह किया है। मैक्रों ने कहा कि ‘गलतफहमियों को दूर कर तनाव कम करना जरूरी है।’ इसी सिलसिले में शुक्रवार को पेरिस में फ्रांस और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर एक विशेष सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे।
कूटनीतिक संबंधों में स्थिरता की कोशिश
यह बातचीत भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी की तीन-दिवसीय वाशिंगटन यात्रा के ठीक बाद हुई थी। पिछले कुछ समय में टैरिफ और अन्य मुद्दों को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में जो अनिश्चितता थी, उसे अब दूर करने की कोशिश की जा रही है। अगले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी भारत दौरे पर आएंगे, जहां वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक रणनीतिक चर्चा करेंगे।
पश्चिम एशिया इस समय से गुजर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बातचीत हुई है। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा और फ्री नेविगेशन बहाल करने पर जोर दिया है।
होर्मुज पर क्यों है दुनिया की नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और इस मार्ग में बढ़ती असुरक्षा के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। ऐसे में इस रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।(भाषा)
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